मुंबई में कितनी बार गैर-मराठी बन चुके हैं मेयर, जानें कितने हिंदी भाषी लोगों को मिल चुका मौका?

How many times has a non-Marathi become the mayor of Mumbai, know how many Hindi speaking people have got the opportunity?

मुंबई में कितनी बार गैर-मराठी बन चुके हैं मेयर, जानें कितने हिंदी भाषी लोगों को मिल चुका मौका?

2026 के बृहन्मुंबई नगर निगम चुनाव के प्रचार के दौरान मराठी पहचान और भाषा को जोरदार तरीके से उठाया गया. लेकिन इसके बावजूद भी चुनाव परिणामों ने एक अलग ही सच्चाई को सामने रखा. 227 सदस्यों वाली बीएमसी में रिकॉर्ड 80 गैर मराठी भाषी पार्षद चुने गए हैं. आइए जानते हैं कि मुंबई में कितनी बार गैर मराठी मेयर बन चुके हैं.  

 

मुंबई : 2026 के बृहन्मुंबई नगर निगम चुनाव के प्रचार के दौरान मराठी पहचान और भाषा को जोरदार तरीके से उठाया गया. लेकिन इसके बावजूद भी चुनाव परिणामों ने एक अलग ही सच्चाई को सामने रखा. 227 सदस्यों वाली बीएमसी में रिकॉर्ड 80 गैर मराठी भाषी पार्षद चुने गए हैं. आइए जानते हैं कि मुंबई में कितनी बार गैर मराठी मेयर बन चुके हैं.  

 

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कब आया मुंबई में मेयर पद अस्तित्व में  
मुंबई में मेयर का पद 1931 में अस्तित्व में आया. पहले के नगर पालिका अध्यक्ष पदनाम को औपचारिक रूप से बदल दिया गया. बस तभी से मेयर का पद शहर के राजनीतिक और सामाजिक बदलावों को दर्शा रहा है. शुरुआती दशकों में मुंबई का नागरिक नेतृत्व इसके महानगरीय स्वरूप को दिखाता था. इसमें अलग-अलग भाषाई, धार्मिक और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि के लोग बड़े पद पर काबिज थे. 

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गैर मराठी मेयरों का दौर 
एतिहासिक रिकॉर्ड ऐसा बताते हैं कि मेयर पद के 94 साल के इतिहास में लगभग 35 गैर मराठी लोगों ने मुंबई के मेयर के रूप में काम किया है. असल में क्षेत्रीय पहचान आधारित राजनीति के उदय से पहले गैर मराठी मेयर कोई अपवाद नहीं बल्कि एक आम बात थी. आजादी और 1968 के बीच 21 में से 15 मेयर गैर मराठी थे. आपको बता दें कि यह मेयर गुजराती, पारसी, मुस्लिम, ईसाई, दक्षिण भारतीय और उत्तर भारतीय जैसे समुदायों को रिप्रेजेंट करते थे. इस दौर में बड़े नाम में सर जे बी बोमन-बेहराम का नाम भी शामिल है. वे मुंबई के पहले मेयर थे और उन्होंने 1931 से 1932 तक यह पद संभाला. इसके बाद 1942 से 1943 तक युसूफ मेहरअली, 1949 से 1952 में एसके पाटिल और 1982 से 1983 में डॉक्टर प्रभाकर पाई मेयर बने.  

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शिवसेना के उदय के बाद एक बड़ा मोड़ 
1973 के बाद मेयर का परिदृश्य काफी ज्यादा बदल गया. शिवसेना के सुधीर जोशी मुंबई के पहले मराठी भाषी मेयर बने. यह एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत थी. अगले तीन दशकों में शिवसेना बीएमसी में एक बड़ी शक्ति के रूप में उभरी और मेयर का पद धीरे-धीरे मराठी भाषी नेताओं के लिए आरक्षित होता गया. पिछले 30 से 35 सालों से मेयर का पद लगभग पूरी तरह से मराठी बोलने वालों के पास रहा है.  

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मुंबई के कितने हिंदी भाषा लोग मेयर बने हैं  
मुंबई में बड़ी संख्या में हिंदी भाषी आबादी होने के बावजूद भी इस समुदाय के नेताओं के लिए मेयर बनने का मौका काफी कम रहा है. मौजूद रिकॉर्ड के मुताबिक केवल दो हिंदी भाषी व्यक्तियों ने ही अब तक इस पद को संभाला है.  पहले थे मुरलीधर देवड़ा. इन्होंने 1977-78 में मेयर के रूप में काम किया. मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले मुरलीधर बाद में एक बड़े कांग्रेस नेता और केंद्रीय मंत्री बने. दूसरे थे आर आर सिंह. उन्होंने 1993 से 1994 तक मेयर के रूप में काम किया. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के थे और कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे. उन्हें मुंबई का आखिरी हिंदी भाषी मेयर माना जाता है.