नई दिल्ली : डॉग फीडर्स की तय होगी जिम्मेदारी… आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मेनका गांधी के बयान पर जताई नाराजगी
New Delhi: Responsibility of dog feeders will be fixed… Supreme Court expressed displeasure over Maneka Gandhi's statement on stray dogs.
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आलोचना पर नाराजगी जताई. हालांकि कोर्ट ने कहा कि टिप्पणी “कंटेम्प्ट” के तौर पर सही है, लेकिन उसने “अपनी उदारता के कारण” आरोपों पर आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई.
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आलोचना पर नाराजगी जताई. हालांकि कोर्ट ने कहा कि टिप्पणी “कंटेम्प्ट” के तौर पर सही है, लेकिन उसने “अपनी उदारता के कारण” आरोपों पर आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई.
आवारा कुत्तों के मामले पर 5वें दिन की सुनवाई मंगलवार को पूरी हुई. मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को दोपहर 2 बजे होगी. आज याचिकाकर्ताओं और NGOs की दलीलें हुई पूरी. अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट राज्यों और एमिकस और NHRC का पक्ष सुनेगा. सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस से पूछा कि क्या आपका नोट तैयार हो गया है? एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कहा कि 7 राज्य शेष हैं.
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उसने कुत्तों को भोजन कराने वालों को जवाबदेह ठहराने संबंधी टिप्पणी व्यंग्यात्मक नहीं, बल्कि गंभीर रूप से की थी. उच्चतम न्यायालय ने मेनका गांधी से सवाल किया कि उन्होंने आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्या का समाधान कराने के लिए बजटीय आवंटन दिलाने में कितनी मदद की है.
आवारा कुत्तों से जुड़े फैसले की आलोचना को लेकर उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह उदारता दिखाते हुए मेनका गांधी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं करेगा. जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि चूंकि आपकी मुवक्किल मंत्री रह चुकी हैं और पशु अधिकार कार्यकर्ता हैं तो हमें बताइए कि आपके आवेदन में बजट आवंटन का जिक्र क्यों नहीं है? इन क्षेत्रों में आपके मुवक्किल का क्या योगदान रहा है…?
मेनका गांधी के बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
मेनका गांधी की ओर से पेश वकील राजू रामचंद्रन ने कहा कि मेरी मुवक्किल कई वर्षों तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री रह चुकी हैं. इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि कुछ देर पहले आप कह रहे थे कि अदालत को सतर्क रहना चाहिए.क्या आपने पता लगाया कि वह किस तरह के बयान दे रही हैं?
रामचंद्रन ने कहा कि बिल्कुल, अगर मैं अजमल कसाब के लिए पेश हो सकता हूं, तो उनके लिए भी पेश हो सकता हूं. इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि आपकी मुवक्किल ने अवमानना की है. हमने कोई कार्रवाई नहीं की है, यही हमारी उदारता है. आप देखिए वह क्या कहती हैं, उनकी बॉडी लैंग्वेज.
टिप्पणी व्यंग्यपूर्ण नहीं, हम गंभीर थे
रामचंद्रन ने कहा कि सार्वजनिक टिप्पणियों के मामले में वकीलों और जजों का दृष्टिकोण अलग-अलग होता है, मुझे आवेदनों पर बोलने दीजिए. वकील राजू रामचंद्रन ने समस्या के समाधान के लिए सुझाव दिए और कहा कि एबीसी नियमों का कार्यान्वयन समग्र रणनीति का अभिन्न अंग है. एनएपीआरई नीति ने रेबीज उन्मूलन में 9 बाधाओं की पहचान की है. इसमें सभी हितधारकों की भूमिका स्पष्ट रूप से बताई गई है और राज्यों को अपनी कार्य योजनाएं विकसित करने का निर्देश दिया गया है. 30 से अधिक राज्यों ने ऐसा नहीं किया है. समाधान स्थायी आश्रय स्थल बनाने में नहीं, बल्कि मौजूदा ढांचे के समयबद्ध कार्यान्वयन में निहित है.
इस पर वकील प्रशांत भूषण ने आगे कहा कि कुत्तों का अल्ट्रासाउंड भी किया जा सकता है. जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि हम कुत्ते को प्रमाण पत्र ले जाने के लिए क्यों नहीं कह सकते? भूषण ने कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि सुनवाई के दौरान जजों ने कुछ टिप्पणियां की हैं, जिनमें से कुछ का गलत अर्थ निकाला गया है, जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि कोई बात नहीं, तर्क अव्यावहारिक हैं.
भूषण ने कहा कि कभी-कभी कोर्ट की टिप्पणियों के गंभीर परिणाम हो जाते हैं. जैसे मान लीजिए पीठ ने व्यंग्यपूर्वक टिप्पणी की कि दाना चुगली करने वालों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, इसकी रिपोर्ट प्रकाशित हुई. जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि नहीं नहीं, बिल्कुल भी व्यंग्यपूर्ण नहीं था. हम गंभीर थे, हमें नहीं पता कि हम क्या करेंगे, लेकिन हम गंभीर थे.
प्रशांत भूषण ने दिया ये तर्क
वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने कहा कि बार के सदस्य के रूप में मैं भी इस पर कुछ कहना चाहता हूं. कार्यवाही का टेलीविजन पर प्रसारण होता है. बार और पीठ दोनों का कर्तव्य है कि वे सतर्क रहें. जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि हम जानते हैं, इसे ध्यान में रखते हुए हम ऐसा करने से बच रहे हैं. वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि कुत्तों की प्रभावी नसबंदी सिर्फ कुछ ही शहरों में कारगर साबित हुई, दुर्भाग्य से यह प्रणाली अधिकांश शहरों में कारगर नहीं रही है. नसबंदी से समय के साथ आवारा कुत्तों की संख्या कम हो जाती है. इससे उनकी आक्रामकता भी कम होती है. इसे प्रभावी कैसे बनाया जाए? इसे पारदर्शी बनाएं और लोगों को जवाबदेह बनाएं. एक ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जहां लोग बिना नसबंदी वाले आवारा कुत्तों की रिपोर्ट कर सकें. शिकायत पर कार्रवाई के लिए नामित अधिकारी होने चाहिए. उन्हें आकर जांच करनी चाहिए और स्थिति का जायजा लेना चाहिए.


