मुंबई : कूपर अस्पताल में एक चौंकाने वाला मामला; डॉक्टर बनने के बाद भी भटक रहा युवक 

Mumbai: A Shocking Case at Cooper Hospital; Even after becoming a doctor, the young man remains a wanderer

मुंबई : कूपर अस्पताल में एक चौंकाने वाला मामला; डॉक्टर बनने के बाद भी भटक रहा युवक 

मनपा के अधीन संचालित कूपर अस्पताल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस अस्पताल में एक पूर्व सैनिक के बेटे और एमबीबीएस पास युवा डॉक्टर को स्कॉलरशिप के बावजूद ७.९३ लाख रुपए की भारी भरकम राशि जमा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। डॉक्टर बनने के बाद भी अपना इंटर्नशिप कंप्लीशन सर्टिफिकेट पाने के लिए दर-दर भटक रहे युवक ने इस अन्याय के खिलाफ सीधे डीन को पत्र लिखकर गुहार लगाई है। आरोप है कि डीएचई योजना के तहत शत-प्रतिशत ट्यूशन फीस माफी के बावजूद कॉलेज प्रशासन न केवल इसका लाभ देने से इनकार कर रहा है, बल्कि सर्टिफिकेट रोककर उनके करियर पर ही ताला लगाने जैसा क्रूर कार्य कर रहा है।

मुंबई : मनपा के अधीन संचालित कूपर अस्पताल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस अस्पताल में एक पूर्व सैनिक के बेटे और एमबीबीएस पास युवा डॉक्टर को स्कॉलरशिप के बावजूद ७.९३ लाख रुपए की भारी भरकम राशि जमा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। डॉक्टर बनने के बाद भी अपना इंटर्नशिप कंप्लीशन सर्टिफिकेट पाने के लिए दर-दर भटक रहे युवक ने इस अन्याय के खिलाफ सीधे डीन को पत्र लिखकर गुहार लगाई है। आरोप है कि डीएचई योजना के तहत शत-प्रतिशत ट्यूशन फीस माफी के बावजूद कॉलेज प्रशासन न केवल इसका लाभ देने से इनकार कर रहा है, बल्कि सर्टिफिकेट रोककर उनके करियर पर ही ताला लगाने जैसा क्रूर कार्य कर रहा है।

 

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मुंबई मनपा द्वारा संचालित कूपर अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में बैच २०२० के डॉ. अंकुश कुमार ने यहीं से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और हाल ही में अपनी इंटर्नशिप भी समाप्त की है। उनके पिता भारतीय नौसेना से वर्ष २००६ में सेवानिवृत्त हुए थे, जिसके आधार पर वे ‘एजुकेशन कंसेशन टू चिल्ड्रन ऑफ एक्स सर्विस मैन’ योजना के लिए पात्र हैं। कॉलेज के वर्ष २०२३ के ब्रोशर में भी इस योजना के लागू होने का स्पष्ट उल्लेख है। इसके बावजूद जब वे नो-ड्यूज लेने प्रशासनिक कार्यालय पहुंचे तो उन्हें चौंकाते हुए ७,९३,४०० रुपए की बकाया राशि थमा दी गई। डॉ. अंकुश का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन यह कहकर पल्ला झाड़ रहा है कि यह संस्थान मुंबई मनपा के अधीन है और राज्य सरकार के नियम उस पर लागू नहीं होते। अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या मुंबई मनपा खुद को सरकार से ऊपर समझ रही है? जब योजना स्पष्ट रूप से सरकारी व अनुदानित संस्थानों पर लागू है और कॉलेज स्वयं को उस श्रेणी में दर्शाता है तो फिर लाभार्थी छात्र से किस आधार पर फीस मांगी जा रही है?

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डॉ. अंकुश ने इस अन्याय के खिलाफ कॉलेज के डीन को लिखित शिकायत दी है, जिसमें उन्होंने अधिसूचना की प्रति और अन्य कॉलेजों में इस योजना के पालन से जुड़े दस्तावेज भी संलग्न किए हैं। उनका कहना है कि अन्य संस्थान इस नियम का पालन कर रहे हैं और छात्रों से फीस नहीं वसूल रहे, जबकि यहां उल्टा दबाव बनाकर वसूली की जा रही है। सर्टिफिकेट रोके जाने के कारण डॉ. अंकुश का पूरा करियर दांव पर लग गया है।
कम समय में राशि जमा करना संभव नहीं

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आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले डॉ. अंकुश का कहना है कि इतनी बड़ी राशि कम समय में जमा करना उनके लिए संभव नहीं है। ऐसे में एक तरफ सरकार पूर्व सैनिकों के परिवारों के लिए योजनाएं घोषित कर रही है, दूसरी ओर जमीनी स्तर पर उन्हें लागू करने में इस तरह की बाधाएं गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
 

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