मुंबई : एसआईईएस ट्रस्ट 58 करोड़ धोखाधड़ी मामले में एफआईआर गायब होने से ट्रायल रुका
Mumbai: Missing FIR stalls trial in SIES Trust Rs 58 crore fraud case
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने साउथ इंडियन एजुकेशन सोसाइटी ट्रस्ट से जुड़े 58 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर को नया नोटिस जारी किया है। यह मामला जुलाई 2014 में दर्ज किया गया था, जब ट्रस्ट ने फिक्स्ड डिपॉजिट में रखे ₹58 करोड़ के फंड के अचानक गायब होने का खुलासा किया और यह राशि बाद में दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर कर दी गई थी।
मुंबई : मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने साउथ इंडियन एजुकेशन सोसाइटी ट्रस्ट से जुड़े 58 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर को नया नोटिस जारी किया है। यह मामला जुलाई 2014 में दर्ज किया गया था, जब ट्रस्ट ने फिक्स्ड डिपॉजिट में रखे ₹58 करोड़ के फंड के अचानक गायब होने का खुलासा किया और यह राशि बाद में दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर कर दी गई थी। पिछले साल फरवरी में कोर्ट ने रिकॉर्ड चेक करते समय पाया कि इस केस की ओरिजिनल एफआईआर गायब थी। यह एफआईआर गायब तब पाई गई जब कोर्ट ने पहले गवाह, ट्रस्टी गणेश शंकरन की गवाही रिकॉर्ड करना शुरू किया। कोर्ट ने इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर को बार-बार नोटिस जारी किए, लेकिन अभी तक उन्होंने गायब एफआईआर के संबंध में कोई रिपोर्ट सबमिट नहीं की। इस वजह से ट्रायल आगे नहीं बढ़ सका और केस की सुनवाई स्थगित रही।
एसआईईएस ट्रस्ट के फंड के गायब होने के मामले में क्राइम ब्रांच की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने मामले की गहराई से जांच की। जांच में पता चला कि यह राशि ट्रस्ट के अन्य अकाउंट में ट्रांसफर कर दी गई थी। ईओडब्ल्यू ने इस ट्रस्ट से जुड़े ग्रुप के अन्य मामलों का भी पता लगाया, जिसमें कई अन्य ट्रस्ट और शैक्षणिक संस्थानों के साथ धोखाधड़ी की गई थी। जांच के दौरान यह सामने आया कि फंड ट्रांसफर करने के लिए कई कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सेंध लगाई गई।
कोर्ट ने इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर को निर्देश दिया कि वह गायब एफआईआर के बारे में पूरी जानकारी तुरंत पेश करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना एफआईआर रिपोर्ट के केस की आगे की सुनवाई संभव नहीं है। अदालत ने कहा कि इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर की लापरवाही और देरी ट्रायल प्रक्रिया में बाधा डाल रही है। इस केस की गंभीरता को देखते हुए, अदालत ने कहा कि आर्थिक अपराधों में तेजी से कार्रवाई आवश्यक है ताकि ऐसे मामलों में न्याय सुनिश्चित हो सके। कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रस्ट के फंड और निवेशकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
2014 में इस मामले के सामने आने के बाद, एसआईईएस ट्रस्ट के अन्य ट्रस्टों और संस्थानों में फंड ट्रांसफर की प्रक्रियाओं की भी जांच की गई। ईओडब्ल्यू के अनुसार, यह ट्रस्ट समूह वित्तीय धोखाधड़ी में शामिल था और कई अन्य फंड के ट्रांसफर की जांच की जा रही है। कोर्ट के नोटिस के बाद, इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर को एफआईआर रिपोर्ट सबमिट करने के लिए एक निर्धारित समय दिया गया है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि रिपोर्ट समय पर नहीं आती है, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कदम से उम्मीद की जा रही है कि ट्रायल जल्द ही शुरू हो सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके। यह मामला शिक्षा क्षेत्र में फंड मैनेजमेंट और प्रशासनिक जवाबदेही की जांच का उदाहरण बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में आर्थिक और कानूनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि धोखाधड़ी और फंड के दुरुपयोग को रोका जा सके


