मुंबई : झीलों पर बड़ा संकट, 10 सालों से साफ नहीं हुआ पानी; अब उठी साइंटिफिक सर्वे की मांग

Mumbai: Lakes face a major crisis, water hasn't been cleaned in 10 years; demands for a scientific survey

मुंबई : झीलों पर बड़ा संकट, 10 सालों से साफ नहीं हुआ पानी; अब उठी साइंटिफिक सर्वे की मांग

गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है. इस समय अधिक तेज धूप पड़ने से कई नदियों और जलाशयों का पानी सूखने लगता है. ऐसे में शहर के लोगों तक पानी की पर्याप्त आपूर्ति के लिए प्रशासन कई तरह के कदम उठाती है. मुंबई में भी गर्मी बढ़ने के साथ प्रशासन ने हर घरों तक पानी पहुंचाने वाली 7 झीलों के पानी के स्तर का साइंटिफिक सर्वे कराने की मांग की है. बता दें कि मुंबई एक प्रायद्वीपीय द्वीप शहर ( Peninsular Island City) होने के चलते 3 तरफ से अरब सागर और खाड़ियों से घिरा है. इसके पास साफ पानी का कोई नेचुरल सोर्स नहीं है. 

मुंबई : गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है. इस समय अधिक तेज धूप पड़ने से कई नदियों और जलाशयों का पानी सूखने लगता है. ऐसे में शहर के लोगों तक पानी की पर्याप्त आपूर्ति के लिए प्रशासन कई तरह के कदम उठाती है. मुंबई में भी गर्मी बढ़ने के साथ प्रशासन ने हर घरों तक पानी पहुंचाने वाली 7 झीलों के पानी के स्तर का साइंटिफिक सर्वे कराने की मांग की है. बता दें कि मुंबई एक प्रायद्वीपीय द्वीप शहर ( Peninsular Island City) होने के चलते 3 तरफ से अरब सागर और खाड़ियों से घिरा है. इसके पास साफ पानी का कोई नेचुरल सोर्स नहीं है. 

 

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झीलों में जमी गाद  
मुंबई शहर को विहार, तुलसी, भाटसा, मोदक सागर, मध्य वैतरणा, तानसा और ऊपरी वैतरणा इन 7 अलग-अलग झीलों से रोज पानी सप्लाई मिलती है. कांग्रेस पार्षद आयशा वानू ने BMC के नगर निगम में एक याचिका दायर कर कहा कि मुंबई के बॉर्डर में वॉटर सप्लाई करने वाली झीलों में भारी मात्रा में गाद जमा हुआ है, जिसके चलते उनकी स्टोरेज कैपिसिटी घट रही है. इसके चलते गर्मी में पानी की समस्या और गंभीर हो जाती है. उन्होंने कहा कि इससे BMC की ओर से नागरिकों को पानी की सप्लाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.   

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झीलों का साइंटिफिक सर्वे किया जाए
आयशा वानू ने अपने नोटिस में कहा,' बढ़ते शहरीकरण, जंगलों की कटाई और अनियंत्रित गार्बेज डिस्पोजल झीलों में गाद जमा होने के कुछ प्रमुख कारण हैं. इसे ध्यान में रखते हुए नगर निगम का दृढ़ मत है कि मुंबई शहर को पानी सप्लाई करने वाली सभी झीलों का साइंटिफिक सर्वे किया जाए और इन झीलों में जमा गाद को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाए. इसके साथ ही इसके लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम भी तैयार किया जाए.'  नोटिस में नगर प्रशासन से इस संबंध में एक रिपोर्ट पेश करने के लिए भी कहा गया.  

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2015 से नहीं हुई सफाई 
नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, साल 2015 से ही इन 7 झीलों से गाद निकालने की प्रक्रिया नहीं हुई है. इस प्रक्रिया में नदियों, झीलों या तालाब के तल में जमी मिट्टी या गाद को निकाला जाता है. इसका मकसद जलभराव को रोकना, फ्लड मैनेजमेंट करना और पानी की गुणवत्ता सुधारना होता है. रिकॉर्ड से यह भी पता चला है कि मुंबई की 7 झीलों में कुल वॉटर स्टोरेज 14.47 लाख लीटर कुल क्षमता के मुकाबले केवल 35 प्रतिशत यानी 5.20 लाख लीटर है. अधिकारियों का कहना है कि तापमान में वृद्धि के चलते इवैपोरेशन की स्पीड तेज हो गई है. पिछले साल मई 2025 के पहले हफ्ते तक जलस्तर 20 प्रतिशत से नीचरे गिर गया था. हालांकि, मानसून जल्दी होने के चलते समय से पहले ही जलाशय भर गए थे. 

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