मुंबई : कानूनी अधिकार के अभाव के बावजूद अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में सरकारी हस्तक्षेप

Mumbai: Government interference in minority educational institutions despite lack of legal authority

मुंबई : कानूनी अधिकार के अभाव के बावजूद अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में सरकारी हस्तक्षेप

कोई कानूनी अधिकार न होने के बावजूद, राज्य के शिक्षा अधिकारी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में कर्मचारियों की नियुक्ति में दखल दे रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसके चलते नागपुर हाई कोर्ट की बेंच ने शिक्षा अधिकारियों के प्रति अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है।

मुंबई : कोई कानूनी अधिकार न होने के बावजूद, राज्य के शिक्षा अधिकारी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में कर्मचारियों की नियुक्ति में दखल दे रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसके चलते नागपुर हाई कोर्ट की बेंच ने शिक्षा अधिकारियों के प्रति अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है।

 

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कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इस फैसले की एक प्रति विदर्भ के सभी शिक्षा अधिकारियों को भेजी जाए, ताकि उनमें जागरूकता पैदा हो सके। यह प्रति सरकारी वकील के कार्यालय को सौंप दी गई है।

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अकोला ज़िले के पातूर स्थित 'शाहबाबू उर्दू शिक्षण संस्थान' को 17 जून, 2005 को अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान किया गया था। संविधान के अनुच्छेद 30 (1) के अनुसार, सभी धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान स्थापित करने और उनका प्रबंधन करने का अधिकार है। इसी बीच, शिक्षा अधिकारियों ने शाहबाबू उर्दू शिक्षण संस्थान में तीन जूनियर क्लर्कों की नियुक्ति को मंज़ूरी देने और उन्हें 'शालार्थ आईडी' जारी करने से इनकार कर दिया था।

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