मुंबई के पार्क और खेल के मैदानों पर बनेगी झुग्गी पुनर्वास योजना! सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब

Mumbai's parks and playgrounds will be used as a slum rehabilitation project! The Supreme Court has sought a response from the Maharashtra government.

मुंबई के पार्क और खेल के मैदानों पर बनेगी झुग्गी पुनर्वास योजना! सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार और बृहन्मुंबई नगर निगम सहित अन्य पक्षों से उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी गई है. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में उन भूखंडों पर झुग्गी पुनर्वास योजनाओं की अनुमति दी थी, जो मूल रूप से पार्क, बगीचों और खेल के मैदानों के लिए आरक्षित थे. यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने आया. पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने रखा. इसके बाद कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार, झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण, बृहन्मुंबई नगर निगम और अन्य पक्षों को नोटिस जारी करने का फैसला किया.

मुंबई : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार और बृहन्मुंबई नगर निगम सहित अन्य पक्षों से उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी गई है. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में उन भूखंडों पर झुग्गी पुनर्वास योजनाओं की अनुमति दी थी, जो मूल रूप से पार्क, बगीचों और खेल के मैदानों के लिए आरक्षित थे. यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने आया. पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने रखा. इसके बाद कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार, झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण, बृहन्मुंबई नगर निगम और अन्य पक्षों को नोटिस जारी करने का फैसला किया.

 

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हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए, दीवान ने तर्क दिया कि मुंबई में सार्वजनिक खुले स्थानों की रक्षा करना बेहद जरूरी है. अदालत ने एनजीओ 'अलायंस फॉर गवर्नेंस एंड रिन्यूअल', नीरा पुंज और नयना कठपालिया (जो हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता थे) का प्रतिनिधित्व कर रहे दीवान से कहा कि वे मामले के जल्द निपटारे के लिए याचिका की कॉपी और नोटिस स्थायी वकील को सौंपें.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने जून 2025 में झुग्गी पुनर्वास योजनाओं से जुड़े एक नियम की वैधता को बरकरार रखा था. कोर्ट ने यह फैसला मुंबई में हरियाली की भारी कमी और सिर छिपाने के संवैधानिक अधिकार के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से सुनाया था. अदालत ने 'डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेगुलेशंस 2034' के नियम 17 को वैध माना था.

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यह नियम उन जमीनों पर भी झुग्गी पुनर्वास योजनाओं को लागू करने की अनुमति देता है जो मूल रूप से पार्क, बगीचों और खेल के मैदानों के लिए आरक्षित थीं, बशर्ते उस जमीन का एक हिस्सा वापस जनता के लिए बहाल किया जाए. जस्टिस अमित बोरकर और जस्टिस सोमशेखर की हाई कोर्ट की पीठ ने 'नागर' द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था. हालांकि, कानून की वैधता को बरकरार रखते हुए हाई कोर्ट ने 17 बिंदुओं वाला एक सख्त निर्देश जारी किया था. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वादे के मुताबिक छोड़े गए खुले स्थान केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि वे वास्तव में जनता के इस्तेमाल के लायक और सुलभ हों.

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याचिकाकर्ताओं ने इस नियम को चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि आरक्षित खुले स्थानों के 65 प्रतिशत तक के हिस्से पर निर्माण की अनुमति देना "अतिक्रमण को कानूनी जामा पहनाना" है. उन्होंने कहा कि यह 'पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन' का उल्लंघन है, जिसके तहत सरकार सार्वजनिक संपत्तियों की संरक्षक होती है.

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