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Read More... मुंबई के पार्क और खेल के मैदानों पर बनेगी झुग्गी पुनर्वास योजना! सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब
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By Online Desk
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार और बृहन्मुंबई नगर निगम सहित अन्य पक्षों से उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी गई है. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में उन भूखंडों पर झुग्गी पुनर्वास योजनाओं की अनुमति दी थी, जो मूल रूप से पार्क, बगीचों और खेल के मैदानों के लिए आरक्षित थे. यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने आया. पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने रखा. इसके बाद कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार, झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण, बृहन्मुंबई नगर निगम और अन्य पक्षों को नोटिस जारी करने का फैसला किया. मुंबई : 11.20 लाख झोपड़ियों का पुनर्वसन; झोपडीधारकों के लिए बड़ी राहत की घोषणा
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झोपडीधारकों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत की घोषणा की है। वषों से अटके पड़े पुनर्वसन को अब क्लस्टर पुनर्विकास योजना के तहत मंजूरी मिल गई है। नया जीआर जारी करके सरकार ने साफ किया है कि सीआरजेड जोन-1 और जोन-2 में आने वाली सभी झोपड़ियों को एक साथ मिलाकर 5 किमी की परिधि में किसी सुरक्षित जगह पर पुनर्वसित किया जाएगा। मुंबई : झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास में तेज़ी लाने के लिए झुग्गी निवासियों की सहमति आवश्यक नहीं - राज्य सरकार ; एसआरए को नोडल एजेंसी नियुक्त किया
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मुंबई की मलिन बस्तियों के पुनर्विकास में तेज़ी लाने के लिए राज्य सरकार ने कहा कि स्लम क्लस्टर पुनर्विकास योजना के लिए झुग्गी निवासियों की सहमति आवश्यक नहीं है। जारी एक सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के अनुसार, राज्य ने न्यूनतम 50 एकड़ के सन्निहित भूमि क्षेत्र पर भी झुग्गी क्लस्टरों की अनुमति दी है, जिसमें से 51% से अधिक स्लम क्षेत्र होगा। विकास नियंत्रण एवं संवर्धन विनियम (डीसीपीआर) के विनियम 33(10) के तहत पहले से स्वीकृत योजनाओं को क्लस्टर पुनर्विकास योजना में शामिल किया जा सकता है।यह निर्दिष्ट क्लस्टर क्षेत्र के भीतर औद्योगिक, वाणिज्यिक और गोदाम भवनों सहित गैर-स्लम संरचनाओं पर भी लागू होता है। मुंबई : झोपड़पट्टी पुनर्विकास योजना के उद्देश्य के अनुरूप शीघ्रता से लागू किया जाए - मुंबई हाई कोर्ट
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मुंबई हाई कोर्ट ने झोपड़पट्टी पुनर्विकास योजनाओं के कार्यान्वयन में बार-बार होनेवाली देरी पर चिंता व्यक्त की है और झोपड़पट्टी पुनर्विकास प्राधिकरण (एसआरए) को निर्देश दिया है कि योजनाओं को झोपड़पट्टी पुनर्विकास योजना के उद्देश्य के अनुरूप शीघ्रता से लागू किया जाए। अदालत ने कहा कि वैधानिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप या बाधा योजना के उस उद्देश्य को ही नष्ट कर देता है, जिसका मकसद झुग्गीवासियों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। 
