मुंबई : 11.20 लाख झोपड़ियों का पुनर्वसन; झोपडीधारकों के लिए बड़ी राहत की घोषणा
Mumbai: 1.12 million slum dwellers to be rehabilitated; major relief announced for slum dwellers
झोपडीधारकों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत की घोषणा की है। वषों से अटके पड़े पुनर्वसन को अब क्लस्टर पुनर्विकास योजना के तहत मंजूरी मिल गई है। नया जीआर जारी करके सरकार ने साफ किया है कि सीआरजेड जोन-1 और जोन-2 में आने वाली सभी झोपड़ियों को एक साथ मिलाकर 5 किमी की परिधि में किसी सुरक्षित जगह पर पुनर्वसित किया जाएगा।
मुंबई : झोपडीधारकों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत की घोषणा की है। वषों से अटके पड़े पुनर्वसन को अब क्लस्टर पुनर्विकास योजना के तहत मंजूरी मिल गई है। नया जीआर जारी करके सरकार ने साफ किया है कि सीआरजेड जोन-1 और जोन-2 में आने वाली सभी झोपड़ियों को एक साथ मिलाकर 5 किमी की परिधि में किसी सुरक्षित जगह पर पुनर्वसित किया जाएगा। हालांकि यह घोषणा पुनर्वसन की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करती है, लेकिन नए जीआर के प्रावधानों को लेकर राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर तीखा विरोध भी शुरू हो गया है।
मुंबई में अब भी 11.20 लाख झोपड़ी संरचनाएं पुनर्वसन की प्रतीक्षा में
मुंबई में कुल 13.80 लाख झोपड़ी संरचनाएं हैं। जिनमें से 2.60 लाख का अब तक पुनर्वसन किया जा चुका है। लगभग 11.20 लाख झोपड़ियों का पुनर्वसन अभी बाकी है। इसमें से 5,67,267 झोपड़ियों का पुनर्वसन प्रस्तावित है, जबकि 3,26,733 पात्र झोपडीधारक आवास आवंटन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सबसे जटिल वह हिस्सा है, जिसमें 2.26 लाख झोपड़ी संरचनाएं वैधानिक या नीतिगत बाधाओं के कारण अटकी हैं।
इनमें से 1.41 लाख संरचनाएं केंद्रीय सरकारी जमीन पर हैं, जिनके लिए केंद्र की मंजूरी अनिवार्य है। कोई स्पष्ट नीति न होने के कारण इनका पुनर्वसन वर्षों से ठप पड़ा था। इन्हीं में से 85 हजार झोपड़ियां सीआरजेड क्षेत्र में आती हैं। समुद्री तटीय नियमों के कारण इन झोपड़ियों का इन-सीटू (उसी जगह) पुनर्वसन संभव नहीं था। इसी वजह से यह परियोजना लंबे समय से रुकी हुई थी। अब नए जीआर के बाद यह बाधा हटती दिखाई दे रही है।
वर्षों से अटके पुनर्वसन को क्लस्टर योजना की मंजूरी
राज्य के हाउसिंग डिपार्टमेंट ने हाल ही में जारी निर्णय में कहा है कि सीआरजेड-1 और सीआरजेड-2 क्षेत्री की झोपड़ियी की मिलाकर क्लस्टर पुनर्विकास के दायरे में शामिल किया जाएगा पुनर्वसन सीआरजेड जमीन पर नहीं होगा, बल्कि 5 किमी के दायरे में किसी उपयुक्त स्थान पर किया जाएगा। सीआरजेड-1 से झोपड़ियों को हटाने के बाद बची जमीन पर पार्क, गार्डन जैसी सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, सीआरजेड-2 में डेवलपरों को सेल कंपोनेट (विक्रय योग्य हिस्सा) विकसित करने की अनुमति मिलेगी, सरकार का दावा है कि इन कदमों से समुद्र किनारे रहने वाले हजारों परिवारों को सुरक्षित, स्थायी और व्यवस्थित आवास मिल सकेगा।
विरोध के स्वर तेज
हालांकि, इस जीआर के बाद राजनीतिक धमासान भी शुरू हो गया है, विपक्ष ने इसे लोगों के संवैधानिक अधिकारी पर हमला बताते हुए कड़ी आलोचना की है। स्थानीय समुदायों, खासकर कोलीवाड़ा और पारंपरिक बस्तियों में भी चिंता बढ़ी है कि कहीं उन्हें झोपडपट्टी घोषित कर जबरन पुनर्विकास में न जोड़ा जाए। सांसद और कांग्रेस मुंबई अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि यह सरकार अक्सर “घर में घुसकर मारेंगे’ की भाषा बोलती है, लेकिन अब यह साफ हो गया है कि पड़ोसी देश नहीं, आपके अपने ही घर पर वार करने की तैयारी है।
नया जीआर लोगों का अपने घर पर अधिकार खत्म करने जैसा है, सरकार चाहे तो कल दक्षिण मुंबई के आर्ट डेको डिस्ट्रिक्ट में भी क्लस्टर डेवलपमेंट लागू कर दे और निवासियों की सहमति ही खत्म कर दे। सरकार कोलीवाड़ा और पारंपरिक बस्तियों को झोपड़पट्टी बताकर नोटिस भेज रही है। ये बस्तियां दशकों से मौजूद है। अब इन्हें पीएम और सीएम के दोस्तों को जमीन देने के लिए उखाड़ा जाएगा? यह किसी कथित अवैध बस्ती की बात नहीं है, यह आपके लोकतांत्रिक अधिकार छीनने की बात है। आज स्लम है। कल सोसायटी।


