दिल्ली : रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में हुई मीटिंग में विपक्ष के नेताओं को न बुलाए जाने पर कांग्रेस ने जताई कड़ी आपत्ति 

Delhi: Congress strongly objected to the non-invitation of opposition leaders to the meeting of Russian President Vladimir Putin at Rashtrapati Bhavan in Delhi.

दिल्ली : रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में हुई मीटिंग में विपक्ष के नेताओं को न बुलाए जाने पर कांग्रेस ने जताई कड़ी आपत्ति 

भारत दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में हुई मीटिंग में विपक्ष के नेताओं को न बुलाए जाने पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने कहा है कि रूस के साथ रिश्तों की नींव कांग्रेस के समय में ही रखी गई थी। कांग्रेस के नेताओं को न बुलाना कॉर्नस्टट्यूशनल और डेमोक्रेटिक परंपराओं का उल्लंघन है। तिवारी ने कहा कि पिछले 65 वर्षों में जब कांग्रेस केंद्र में सत्ता में थी तो पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी के नियमों और परंपराओं को मानते हुए नेता प्रतिपक्ष को हमेशा प्रोटोकॉल के हिसाब से प्रेसिडेंट की तरफ से। वेलकम सेरेमनी में बुलाया जाता था। 

दिल्ली : भारत दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में हुई मीटिंग में विपक्ष के नेताओं को न बुलाए जाने पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने कहा है कि रूस के साथ रिश्तों की नींव कांग्रेस के समय में ही रखी गई थी। कांग्रेस के नेताओं को न बुलाना कॉर्नस्टट्यूशनल और डेमोक्रेटिक परंपराओं का उल्लंघन है। तिवारी ने कहा कि पिछले 65 वर्षों में जब कांग्रेस केंद्र में सत्ता में थी तो पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी के नियमों और परंपराओं को मानते हुए नेता प्रतिपक्ष को हमेशा प्रोटोकॉल के हिसाब से प्रेसिडेंट की तरफ से। वेलकम सेरेमनी में बुलाया जाता था। 

 

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तिवारी ने कहा परंपराओं का उल्लंघन
मोदी-शाह की कांग्रेस के प्रति दुश्मनी और घमंडी रवैये की वजह से इन तरीकों को कुचला जा रहा है। यह कॉन्स्टट्‌यूशनल और डेमोक्रेटिक परंपराओं का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि सन 1971 की लड़ाई में अमेरिका ने बंगाल की खाड़ी में एयरक्राफ्ट कैरियर भेजकर पाकिस्तान का साथ दिया था। रूस ने पंडित नेहरू, शास्त्री और इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत को मदद की पेशकश की थी।

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इतिहास गवाह है कि उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की विदेश नीति और डिप्लोमेसी की वजह से ही भारत अगस्त 1971 में शांति, दोस्ती और सहयोग का भारत-सोवियत समझौता साइन कर पाया था। कांग्रेस के समय में रूस के साथ बनी दोस्ती समय-समय पर भारत के काम आई है। रूस ने चीन की धमकियों से डरे बिना भारत का साथ दिया और हमेशा अपनी दोस्ती बनाए रखी।

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