मुंबई : शेयर-ट्रेडिंग साइबर धोखाधड़ी ; मुनाफे के लालच में कारोबारी ने गंवाए १०.९८ करोड़
Mumbai: Share-Trading Cyber Fraud; 10.98 crores were lost by traders in the greed of profits
साइबर पुलिस ने हाल ही में एक ६८ वर्षीय कारोबारी के साथ हुए १०.९८ करोड़ के शेयर-ट्रेडिंग साइबर धोखाधड़ी मामले की जांच में पाया है कि आरोपियों ने धोखाधड़ी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए लगभग ३६,६५६ फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल किया था। इस रकम का एक हिस्सा चीन से संचालित होने वाले सूदखोरी वाले लोन ऐप्स और अवैध ऑनलाइन गेम्स को फंड करने में भी इस्तेमाल किया गया था। यही नहीं ठगों ने पैसों को क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर चीन / कंबोडिया भेज दिया। इसके अलावा ठगों ने कुछ पैसे चीनी लोन ऐप में भी लगाए, जो अत्यधिक ब्याज दरें वसूलते थे और कर्ज न चुकाने वालों को परेशान करते थे।
मुंबई : साइबर पुलिस ने हाल ही में एक ६८ वर्षीय कारोबारी के साथ हुए १०.९८ करोड़ के शेयर-ट्रेडिंग साइबर धोखाधड़ी मामले की जांच में पाया है कि आरोपियों ने धोखाधड़ी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए लगभग ३६,६५६ फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल किया था। इस रकम का एक हिस्सा चीन से संचालित होने वाले सूदखोरी वाले लोन ऐप्स और अवैध ऑनलाइन गेम्स को फंड करने में भी इस्तेमाल किया गया था। यही नहीं ठगों ने पैसों को क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर चीन / कंबोडिया भेज दिया। इसके अलावा ठगों ने कुछ पैसे चीनी लोन ऐप में भी लगाए, जो अत्यधिक ब्याज दरें वसूलते थे और कर्ज न चुकाने वालों को परेशान करते थे।
बता दें कि कारोबारी ने पुलिस में २० जनवरी को शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस के मुताबिक, कारोबारी को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने अपना नाम मोहन शर्मा बताया और कहा कि उनकी कंपनी के जरिए शेयर बाजार में निवेश करके वे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। शर्मा ने शिकायतकर्ता को ट्रेडर टाइटन वीआईपी ग्रुप नाम के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में शामिल होने के लिए कहा, जहां निवेश पर अधिक मुनाफा कमाने के टिप्स साझा किए जाते थे। ग्रुप के सदस्यों ने अपने द्वारा कमाए गए मुनाफे का ब्यौरा भी साझा किया। ऊंचे मुनाफे के लालच में आकर कारोबारी ने फर्म के माध्यम से निवेश करने की इच्छा जताई।
शर्मा ने फिर उन्हें एलेक्स नाम के एक व्यक्ति से मिलवाया, जिसने खुद को एक अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फर्म का महाप्रबंधक बताया और शिकायतकर्ता को एक अन्य प्रीमियम व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ दिया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि ३० दिसंबर २०२५ से १७ जनवरी २०२६ के बीच व्यवसायी ने धोखाधड़ी वाले एप्लिकेशन के माध्यम से लगभग १०.९८ करोड़ रुपए निवेश कर दिए। १७ जनवरी को शिकायतकर्ता अपने निवेश ऐप से पैसे निकालने में असमर्थ पाया और उसने यह भी देखा कि व्हाट्सऐप ग्रुप पर गतिविधि अचानक बंद हो गई थी।
आरोपी ने उसे धमकी दी कि अगर उसने ८ करोड़ रुपए और निवेश नहीं किए तो उसका खाता और सभी निवेश ब्लॉक कर दिए जाएंगे। इसके बाद शिकायतकर्ता को कुछ गड़बड़ होने का संदेह हुआ और उसने पुलिस से संपर्क किया। जांच के दौरान साइबर पुलिस ने पाया कि शिकायतकर्ता के पैसे ट्रांसफर करने के लिए ११ प्राथमिक बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था। ये चालू खाते उन लोगों द्वारा खोले गए थे जिन्होंने उत्तर प्रदेश, बिहार, उड़ीसा, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र के गोंदिया और अन्य स्थानों पर फर्जी कंपनियां बनाई थीं।


