मुंबईकरों की सांसों पर सीधा हमला!..हवा में जहर, सरकार बेखबर कैंसर की ओर धकेली जा रही मुंबई
A direct attack on Mumbaikars' breathing! Poison in the air, the government unaware, Mumbai is being pushed towards cancer.
बच्चों की मासूम सांसें हों या बुजुर्गों की थकी हुई जिंदगी, मुंबई की हवा किसी को बख्शने के मूड में नहीं है। खांसी, गले में जलन, ब्रोंकाइटिस और अस्थमा अब ‘बीमारी’ नहीं, बल्कि मुंबई की रोजमर्रा की पहचान बनते जा रहे हैं। डराने वाली बात यह है कि ये बीमारियां अब उन परिवारों में भी पनप रही हैं, जिनका कभी कोई मेडिकल इतिहास नहीं रहा। डॉक्टरों की रिपोर्ट साफ चेतावनी दे रही है प्रदूषण अब आने वाली पीढ़ी पर सीधा वार है।
मुंबई : बच्चों की मासूम सांसें हों या बुजुर्गों की थकी हुई जिंदगी, मुंबई की हवा किसी को बख्शने के मूड में नहीं है। खांसी, गले में जलन, ब्रोंकाइटिस और अस्थमा अब ‘बीमारी’ नहीं, बल्कि मुंबई की रोजमर्रा की पहचान बनते जा रहे हैं। डराने वाली बात यह है कि ये बीमारियां अब उन परिवारों में भी पनप रही हैं, जिनका कभी कोई मेडिकल इतिहास नहीं रहा। डॉक्टरों की रिपोर्ट साफ चेतावनी दे रही है प्रदूषण अब आने वाली पीढ़ी पर सीधा वार है।
सरकारी कबूलनामा फिर भी सन्नाटा!
विधानसभा में खुद महाराष्ट्र सरकार ने माना है कि मुंबई में फेफड़ों के वैंâसर के ५७ प्रतिशत मामले सीधे प्रदूषण से जुड़े हैं।
सवाल सीधा है कि अगर सरकार जानती है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं? बीमारियों की राजधानी बनती आर्थिक राजधानी
मुंबई, जो देश की आर्थिक रीढ़ कही जाती है, अब धीरे-धीरे बीमारियों की राजधानी में बदलती जा रही है। फरवरी २०२६ में हालात ऐसे बिगड़े कि डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को खुली चेतावनी जारी करनी पड़ी। प्रदूषण, बढ़ता तापमान और सरकारी लापरवाही तीनों ने मिलकर मुंबईकरों को ‘सांस-सांस पर जिंदगी’ जीने पर मजबूर कर दिया है।


