मुंबई : AIMIM नेता वारिस पठान ने नमाज़ पर FIR और धार्मिक स्वतंत्रता पर उठाए सवाल
Mumbai: AIMIM leader Waris Pathan raises questions on FIR on Namaz and religious freedom
AIMIM नेता वारिस पठान ने हाल ही में नमाज़ पढ़ने के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पठान ने सवाल किया कि क्या मुसलमानों के लिए नमाज़ पढ़ना भारत में अपराध बन गया है। उन्होंने कहा, "अगर रमज़ान का महीना है और नमाज़ का वक्त हो गया और किसी ने नमाज़ पढ़ ली, तो क्या हुआ? क्या हमारे हिन्दू भाई सरकारी दफ्तर में पूजा नहीं करते? हम तो इस पर कोई आपत्ति नहीं करते।"
मुंबई : AIMIM नेता वारिस पठान ने हाल ही में नमाज़ पढ़ने के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पठान ने सवाल किया कि क्या मुसलमानों के लिए नमाज़ पढ़ना भारत में अपराध बन गया है। उन्होंने कहा, "अगर रमज़ान का महीना है और नमाज़ का वक्त हो गया और किसी ने नमाज़ पढ़ ली, तो क्या हुआ? क्या हमारे हिन्दू भाई सरकारी दफ्तर में पूजा नहीं करते? हम तो इस पर कोई आपत्ति नहीं करते।" वारिस पठान ने धार्मिक स्वतंत्रता पर जोर देते हुए कहा कि संविधान ने हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने की आज़ादी दी है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि कौन से कानूनी प्रावधान के तहत नमाज़ियों पर FIR दर्ज की जाती है। उन्होंने कहा कि यह एक पक्षपाती रवैया है और इसका मकसद केवल नफरत फैलाना है।
पठान ने यह भी सुझाव दिया कि अगर सरकारी दफ्तर में किसी धार्मिक आयोजन पर रोक लगानी है, तो यह सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उनका कहना था कि किसी एक समुदाय के लिए अलग कानून और दूसरों के लिए अलग नियम बनाना गलत है। वारिस पठान का बयान राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बन गया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक समानता और संविधानिक अधिकारों का सम्मान होना चाहिए।
उनका मानना है कि सरकार का रवैया धार्मिक विविधता को स्वीकार करने और समान अवसर सुनिश्चित करने के सिद्धांतों के खिलाफ है। इस बयान से न केवल मुस्लिम समुदाय में समर्थन बढ़ा है, बल्कि यह मुद्दा देश में धार्मिक स्वतंत्रता और कानून की समानता पर बहस का विषय बन गया है। AIMIM नेता का यह विरोधी रुख आगामी चुनावों और समाज में धार्मिक संवेदनशीलता के मुद्दों पर नई चर्चा को जन्म दे सकता है।


