लुधियाना : निजी अस्पताल लापरवाह उपचार; पीडि़ता को सात लाख 50 हज़ार रुपए का मुआवजा प्रदान करने का आदेश
Ludhiana: Negligent treatment by a private hospital; ordered to provide compensation of Rs. 750,000 to the victim
उपभोक्ता आयोग कांगड़ा की अदालत ने एक अहम फैसले में पंजाब के लुधियाना के एक निजी अस्पताल व उसके चिकित्सकों को लापरवाह उपचार का दोषी ठहराते हुए अस्पताल की बीमा कंपनी द्वारा पीडि़ता को सात लाख 50 हज़ार रुपए का मुआवजा प्रदान करने के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही अस्पताल को उपभोक्ता महिला को 20 हज़ार रुपए न्यायिक शुल्क के रूप में हुए खर्च के तौर भी भी अदा करने होंगे। उपभोक्ता आयोग कांगड़ा के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा व सदस्य आरती सूद की खंडपीठ ने उक्त अहम फैसला सुनाया है।
लुधियाना : उपभोक्ता आयोग कांगड़ा की अदालत ने एक अहम फैसले में पंजाब के लुधियाना के एक निजी अस्पताल व उसके चिकित्सकों को लापरवाह उपचार का दोषी ठहराते हुए अस्पताल की बीमा कंपनी द्वारा पीडि़ता को सात लाख 50 हज़ार रुपए का मुआवजा प्रदान करने के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही अस्पताल को उपभोक्ता महिला को 20 हज़ार रुपए न्यायिक शुल्क के रूप में हुए खर्च के तौर भी भी अदा करने होंगे। उपभोक्ता आयोग कांगड़ा के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा व सदस्य आरती सूद की खंडपीठ ने उक्त अहम फैसला सुनाया है। जानकारी के अनुसार आयोग में नूरपुर की रहने वाली महिला ने शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसमें पीडि़त महिला ने बताया था कि जुलाई 2022 में बाएं किडनी में पत्थरी की समस्या लेकर लुधियाना के एक निजी अस्पताल पहुंची थीं। अस्पताल द्वारा आरआईआरआर सर्जरी की गई और कुछ दवाइयां दी गईं। सर्जरी के बाद पीडि़त महिला का क्रिएटिनिन बढ़ता गया, तेज दर्द, उल्टी, कमजोरी और अन्य दिक्कतें बढ़ती गईं।
बाद में उन्हें डायलिसिस तक करवाना पड़ा। अस्पताल ने 21 जुलाई व 18 अगस्त को उन्हें उपचार के दौरान एक दवाई दी। आयोग के अनुसार विशेषज्ञों की रिपोर्ट के तहत इस दवाई का संयोजन शरीर पर दुष्प्रभाव डालने के साथ किडनी व लिवर को नुकसान पहुंचाने वाला माना जाता है। साथ ही यह भी पाया गया कि 2022 में इस दवा को लेकर गंभीर चिंताएं दर्ज थीं और 2023 में इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था। इस दौरान आयोग ने माना कि बढ़े हुए क्रिएटिनिन स्तर को जानते हुए भी यह दवा फिर से लिखना गंभीर चिकित्सीय लापरवाही है। इस मामले में आयोग द्वारा नियुक्त चिकित्सा विशेषज्ञ ने कहा कि यह दवा नियमित रूप से लेने पर किडनी और लिवर दोनों को गंभीर क्षति पहुंचाती है। किडनी रोगी को यह दवा किसी भी स्थिति में नहीं दी जानी चाहिए।
आयोग ने माना कि पीडि़त उपभोक्ता के ऊपचार के मामले में अस्पताल और चिकित्सक उचित सावधानी बरतने में असफल रहे। साथ ही आयोग ने यह भी कहा कि दवा लिखने में की गई गंभीर लापरवाही के कारण महिला को स्थायी नुकसान हुआ, जिसके लिए अस्पताल और डाक्टर जिम्मेदार हैं। पीडि़ता 41 वर्ष की युवा महिला है और वर्तमान में डायलिसिस पर निर्भर है, इसलिए उचित मुआवजा दिया जाना आवश्यक है, जिसको आधार मानते हुए आयोग ने संबंधित अस्पताल की बीमा कंपनी द्वारा पीडि़त महिला को उपरोक्त मुआवजा व बाद-व्यय राशि प्रदान करने के आदेश जारी किए हैं।


