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मुंबई : घनी बस्तियों की सफाई पर हर साल 136 करोड़ होगा खर्च... QR कोड से होगी निगरानी

मुंबई : घनी बस्तियों की सफाई पर हर साल 136 करोड़ होगा खर्च... QR कोड से होगी निगरानी स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने घर-घर कचरा संग्रहण की वास्तविक स्थिति जानने के लिए QR कोड आधारित व्यवस्था का सुझाव दिया है। इसके तहत प्रत्येक गली के पहले, बीच और आखिरी घर पर QR कोड लगाया जा सकता है। इन घरों के निवासियों से महीने में एक बार फोटो या वीडियो के साथ फीडबैक लेने का प्रस्ताव है।
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मुंबई : मेयर रितु तावड़े ने कंक्रीटीकरण और गाद सफाई कार्यों का किया निरीक्षण

मुंबई : मेयर रितु तावड़े ने कंक्रीटीकरण और गाद सफाई कार्यों का किया निरीक्षण मेयर रितु तावड़े ने शनिवार को शहर में चल रहे सड़कों के कंक्रीटीकरण कार्य और नालों से गाद निकालने के कामों का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार और समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं, ताकि आगामी मानसून में किसी भी प्रकार की जलभराव या अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो। निरीक्षण के दौरान मेयर ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि कंक्रीट से बनी सड़कों और उनकी ड्रेनेज पाइपलाइनों की नियमित और प्रभावी सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य के दौरान सीमेंट मिश्रित पानी को नालियों में जाने से रोका जाए, क्योंकि इससे ड्रेनेज सिस्टम में अवरोध उत्पन्न हो सकता है और जल निकासी प्रभावित हो सकती है।
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मुंबई : नदियों और नालों की सफाई में सख्त निगरानी के निर्देश

मुंबई : नदियों और नालों की सफाई में सख्त निगरानी के निर्देश नदियों और नालों से गाद निकालने के काम में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अब डिप्टी और असिस्टेंट इंजीनियरों को पूरे समय साइट पर मौजूद रहना होगा। एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर (प्रोजेक्ट्स) अभिजीत बांगर ने बुधवार को चेतावनी देते हुए कहा कि हर नाले और हर दिन के काम की सख्त प्लानिंग के अनुसार निगरानी जरूरी है और सिस्टम में रोजाना अपडेट करना अनिवार्य होगा।
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मुंबई : महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल पर सवाल, वालधुनी नदी सफाई के लिए न फंड, न योजना

मुंबई : महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल पर सवाल, वालधुनी नदी सफाई के लिए न फंड, न योजना वालधुनी नदी की स्थिति को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) के कल्याण उप-प्रादेशिक कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में नदी से जुड़ी गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। वालधुनी नदी स्वच्छता सेवाभावी संस्था के अध्यक्ष सुनील उतेकर द्वारा पिछले 5 वर्षों की जानकारी मांगे जाने पर पता चला कि इस अवधि में नदी के मुद्दे पर सामाजिक और राजनीतिक जनप्रतिनिधियों द्वारा बेहद कम पत्राचार किया गया। 
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