मुंबई : केईएम हॉस्पिटल का नाम बदलने पर विवाद
Mumbai: Controversy erupts over renaming of KEM Hospital
महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा चालकों को लिए मराठी अनिवार्य किए जाने के ऐलान पर जहां राजनीति गर्म है तो वहीं दूसरी तरफ अब मुंबई में प्रतिष्ठित किंग एडवर्ड मेमोरियल हॉस्पिटल का नाम बदलकर कौशल्यश्रेष्ठ एकलव्य मेमोरियल हॉस्पिटल पर विवाद खड़ा हो गया है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी और महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ़ रेजिडेंट डॉक्टर्स के डॉक्टरों से बात की। जो कौशल्यश्रेष्ठ एकलव्य मेमोरियल का नाम बदलने का विरोध कर रहे हैं।
मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा चालकों को लिए मराठी अनिवार्य किए जाने के ऐलान पर जहां राजनीति गर्म है तो वहीं दूसरी तरफ अब मुंबई में प्रतिष्ठित किंग एडवर्ड मेमोरियल हॉस्पिटल का नाम बदलकर कौशल्यश्रेष्ठ एकलव्य मेमोरियल हॉस्पिटल पर विवाद खड़ा हो गया है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी और महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ़ रेजिडेंट डॉक्टर्स के डॉक्टरों से बात की। जो कौशल्यश्रेष्ठ एकलव्य मेमोरियल का नाम बदलने का विरोध कर रहे हैं।
किशोरी पेडनेकर ने संभाला मोर्चा
सोमवार को बीएमसी में नेता विपक्षा और शिवसेना की पार्षद किशोरी पेडनेकर डॉक्टरों से मिलने पहुंचीं। उनके साथ यूबीटी के विधायक अजय चौधरी भी मौजूद रहे। दोनों ने हॉस्पिटल की डीन डॉ. संगीता रावत से मुलाकात की। मुंबई की मेयर रह चुकीं किशोर पेडनेकर से जब जब उनसे पूछा गया कि कहा कि शिवसेना ने 1995 में बॉम्बे का नाम बदलकर मुंबई कर दिया था, लेकिन अब वे शहर के मशहूर किंग एडवर्ड मेमोरियल हॉस्पिटल का नाम बदलकर कौशल्यश्रेष्ठ एकलव्य मेमोरियल हॉस्पिटल करने का विरोध कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि क्यों बदलना है नाम। बॉम्बे से मुंबई करने में सभी सहमति थी। शिवसेना UBT के नेताओं ने इस कदम का विरोध करते हुए इसे विरासत को मिटाने की कोशिश बताया है, जबकि प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि यह आधुनिक समय में भारत की सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों को दर्शाता है।
कैसे शुरू हुआ यह पूरा विवाद?
यह विवाद महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा द्वारा बृहन्मुंबई नगर निगम को लिखे गए एक पत्र के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने अस्पताल का नाम बदलकर 'कौशल्या एकलव्य मेमोरियल अस्पताल' रखने की सिफारिश की थी। स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष हरीश भंडिरगे को संबोधित अपने 25 मार्च के पत्र में, लोढ़ा ने कहा कि भारत अपनी स्वदेशी विरासत को वापस पाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कई सार्वजनिक संस्थानों के नाम अभी भी औपनिवेशिक काल के हैं, जिन्हें उन्होंने विदेशी शासन के तहत देश के अतीत की याद दिलाने वाला बताया। लाेढ़ा की सिफारिश के बाद विरासत बनाम पहचान की बहस छिड़ गई है।
विरोधियों की क्या है दलील
नाम बदलने का विरोध कर रहे लोगों का मानना है कि लंबे समय से चले आ रहे नामों को बदलने से इतिहास को संरक्षित करने के बजाय उसे मिटाने का खतरा पैदा हो जाता है। कई नागरिकों के लिए, केईएम अस्पताल सिर्फ एक नाम से कहीं ज्यादा है। यह मुंबई में दशकों के भरोसे, सेवा और चिकित्सा देखभाल का प्रतीक है। हॉस्पिटल का नाम बदलने का फैसला बीएमसी को लेना है। अब देखना है कि बीएमसी क्या निर्णय लेती है।
केईएम ने पूरे किए हैं 100 साल
मुंबई का प्रतिष्ठित केईएम अस्पताल 22 जनवरी 1926 को स्थापित किया गया था। यह अस्पताल बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) द्वारा संचालित किया जाता है और इसके साथ ही सेठ गोवर्धनदास सुंदरदास मेडिकल कॉलेज भी चलता है। यह एशिया के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक है जो मुख्य रूप से गरीब मरीजों को कम लागत में इलाज प्रदान करता है। यह मुंबई के परेल में स्थित है। 2026 में केईएम ने अपने 100 पूरे किए हैं।


