नई दिल्ली : बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन और चोरी की चल रही जांच के संबंध में 159.51 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त
New Delhi: Assets worth Rs 159.51 crore seized in connection with ongoing investigation into large-scale illegal coal mining and theft
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मुख्यालय कार्यालय ने पूर्वी कोयला क्षेत्र लिमिटेड (ईसीएल) के पट्टे वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन और चोरी की चल रही जांच के संबंध में 159.51 करोड़ रुपये की संपत्ति, अस्थायी रूप से जब्त कर ली है। जांच में सामने आया है कि पश्चिम बंगाल का 'लाला', जो अवैध माइनिंग के धंधे में लिप्त था, उसके नकली 'पैड' की खूब तूती बोलती थी। पुलिस व आरटीओ, 'लाला' के पैड को देखकर अवैध माइनिंग के ट्रकों को ग्रीन सिग्नल दे देते थे। सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 'लाला' का गिरोह, पश्चिम बंगाल की कई फैक्ट्रियों में कोयले की आपूर्ति करता था।
नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मुख्यालय कार्यालय ने पूर्वी कोयला क्षेत्र लिमिटेड (ईसीएल) के पट्टे वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन और चोरी की चल रही जांच के संबंध में 159.51 करोड़ रुपये की संपत्ति, अस्थायी रूप से जब्त कर ली है। जांच में सामने आया है कि पश्चिम बंगाल का 'लाला', जो अवैध माइनिंग के धंधे में लिप्त था, उसके नकली 'पैड' की खूब तूती बोलती थी। पुलिस व आरटीओ, 'लाला' के पैड को देखकर अवैध माइनिंग के ट्रकों को ग्रीन सिग्नल दे देते थे। सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 'लाला' का गिरोह, पश्चिम बंगाल की कई फैक्ट्रियों में कोयले की आपूर्ति करता था।
जब्त संपत्ति में कॉर्पोरेट बॉन्ड व निवेश फंड ...
ईडी की जांच में पता चला है कि अवैध खनन कार्य अनुप मजी उर्फ 'लाला' के नेतृत्व वाले एक गिरोह द्वारा किया जा रहा था। उसे पश्चिम बंगाल की कुछ लाभार्थी कंपनियों के लिए अवैध रूप से निकाले गए कोयले को नकद में खरीदने का दोषी पाया गया। इससे 'अपराध की आय' को वैध दिखाने और उसे छिपाने में मदद मिली। जब्त की गई संपत्तियों में चल वित्तीय साधनों में निवेश शामिल है, जैसे कि कॉर्पोरेट बॉन्ड और वैकल्पिक निवेश फंड, जो लाभार्थी संस्थाओं के नाम पर हैं। इनमें श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड और श्याम फेरो अलॉयज लिमिटेड शामिल हैं, जो संजय अग्रवाल और बृज भूषण अग्रवाल द्वारा प्रबंधित और नियंत्रित श्याम समूह का हिस्सा हैं।
यूं चलती थी 'लाला पैड' अवैध चालान प्रणाली ...
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह अवैध रूप से कोयले की खुदाई और बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी में लिप्त था। स्थानीय प्रशासनिक तत्वों की सक्रिय मिलीभगत से पश्चिम बंगाल की कई फैक्ट्रियों में कोयले की आपूर्ति होती थी। वह 'लाला पैड' नामक एक अवैध परिवहन चालान प्रणाली का उपयोग करता था। ये काल्पनिक संस्थाओं के नाम पर जारी किए गए फर्जी कर चालान होते थे।
ट्रांसपोर्टर को थमाते थे 10-20 रुपये का नोट ...
फर्जी परिवहन चालान के साथ, ट्रांसपोर्टर को 10 या 20 रुपये का एक नोट दिया जाता था। ट्रांसपोर्टर अवैध कोयले से भरे ट्रक, डम्पर या टिपर की नंबर प्लेट के पास नोट को पकड़कर उसकी तस्वीर लेता था। उसके बाद वह तस्वीर कोयला गिरोह के संचालक को भेजी जाती थी। संचालक फिर उस तस्वीर को व्हाट्सएप के माध्यम से वाहन के मार्ग में स्थित संबंधित पुलिस अधिकारियों और अन्य सरकारी अधिकारियों को भेजता था। यह इसलिए किया जाता ताकि ट्रक को रोका न जाए। यदि रोका भी जाए तो उसे तुरंत छोड़ दिया जाए।
भूमिगत हवाला नेटवर्क का उपयोग ...
जांच में यह भी पता चला है कि अपराध से प्राप्त धन को नकद में स्थानांतरित करने के लिए एक भूमिगत हवाला नेटवर्क का उपयोग किया जा रहा था। इसके जरिए औपचारिक बैंकिंग चैनलों को दरकिनार किया जाता था। लेन-देन को विशिष्ट पहचानकर्ताओं, आमतौर पर प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच साझा किए गए करेंसी नोट के सीरियल नंबर, के माध्यम से प्रमाणित किया जाता था। नोट के मिलान के सत्यापन के बाद, बिना किसी औपचारिक दस्तावेजीकरण के नकद राशि सौंप दी जाती थी। इससे धन का निर्बाध और पता न चलने योग्य हस्तांतरण संभव हो जाता था।
अभी तक 482.22 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच ...
इस मामले में अभी तक कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 482.22 करोड़ रुपये हो गया है। इस अपराध में अवैध धन के स्रोत और स्वामित्व को छिपाने के लिए डिज़ाइन किए गए जटिल वित्तीय लेन-देन की कई परतें शामिल हैं। ईडी, अंतिम लाभार्थियों की पहचान करने, अपराध से प्राप्त अतिरिक्त धन का पता लगाने और मनी लॉन्ड्रिंग प्रक्रिया में शामिल सभी व्यक्तियों का पता लगाने के लिए इन परतों को व्यवस्थित रूप से उजागर करना जारी रखे हुए है। ईडी, आर्थिक अपराधों, विशेष रूप से अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है, जो सार्वजनिक संसाधनों और आर्थिक अखंडता को कमजोर करते हैं।


