मुंबई : महावितरण में महाघोटाला; सरकारी खजाने पर १०० करोड़ रुपए का डाका डालने का सनसनीखेज मामला उजागर
Mumbai: A massive scam at Mahavitaran; a sensational Rs 100 crore robbery of the government treasury has been exposed.
महावितरण में महाघोटाला सामने आया है, जिसने मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी २.० योजना की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फर्जी बैंक गारंटी के सहारे सरकारी खजाने पर १०० करोड़ रुपए का डाका डालने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। बताया गया है कि जिस योजना को किसानों के हित और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए बनाया गया था, उसी योजना में घोटालों का जहर घुसने से प्रशासनिक तंत्र हिल गया है।
मुंबई : महावितरण में महाघोटाला सामने आया है, जिसने मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी २.० योजना की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फर्जी बैंक गारंटी के सहारे सरकारी खजाने पर १०० करोड़ रुपए का डाका डालने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। बताया गया है कि जिस योजना को किसानों के हित और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए बनाया गया था, उसी योजना में घोटालों का जहर घुसने से प्रशासनिक तंत्र हिल गया है। इस प्रकरण में चार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि मामले की गंभीरता को देखते हुए अब आर्थिक अपराध शाखा द्वारा गहन जांच किए जाने की तैयारी है। यह घोटाला न केवल महावितरण, बल्कि पूरे सरकारी तंत्र के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, २०२४ से जनवरी २०२६ की अवधि के दौरान ओम एस सीजेआर लामाट व्हिया प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. ने महावितरण के साथ गंभीर आर्थिक धोखाधड़ी की। आरोप है कि कंपनी के निदेशकों ने करीब ९९ करोड़ ५० लाख रुपए की फर्जी बैंक गारंटी तैयार कर उसे असली बताकर पेश किया और इसी आधार पर परियोजना का काम हासिल किया। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की गुजरात के जूनागढ़ शाखा के नाम पर नकली बैंक गारंटी तैयार की। इतना ही नहीं इस गारंटी को वैध साबित करने के लिए एसबीआई के नाम से फर्जी ई-मेल आईडी का भी इस्तेमाल किया गया। यह बैंक गारंटी महावितरण के मुंबई स्थित नवीकरणीय ऊर्जा विभाग में जमा कराई गई थी।
अंदरखाने मिलीभगत का आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि महावितरण के नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के सहायक महाप्रबंधक राहुल पन्हाले ने बैंक गारंटी के फर्जी होने की जानकारी होने के बावजूद उसे जानबूझकर वास्तविक बताकर संबंधित कंपनी को काम दिलाने में मदद की। इस पूरे प्रकरण में व्यक्तिगत आर्थिक लाभ के लिए नियमों की अनदेखी किए जाने का आरोप है।
महावितरण को हुआ भारी नुकसान
फर्जी बैंक गारंटी के कारण महावितरण समय पर सुरक्षा राशि भुना नहीं सकी। परिणामस्वरूप, सरकार और महावितरण को लगभग ९९.५० करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ है। इस मामले में महावितरण के कर्मचारियों द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर निर्मल नगर पुलिस स्टेशन में कंपनी निदेशक भावेश कुमार पटेल, हितेश भाई राविया, हिरेन कुमार कनानी और अधिकारी राहुल पन्हाले के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान और भी बड़े खुलासे तथा अन्य जिम्मेदारों की भूमिका सामने आ सकती है।


