मुंबई: जापान में बनाई जा रही मशीन तीन महीने में मुंबई पहुंचेगी; रुका है बुलेट ट्रेन का काम!

Mumbai: The machine being made in Japan will reach Mumbai in three months; Ruka Hai Bullet Train Ka Kam!

मुंबई: जापान में बनाई जा रही मशीन तीन महीने में मुंबई पहुंचेगी; रुका है बुलेट ट्रेन का काम!

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में मुख्य सुरंग का काम 'टनल बोरिंग मशीन' या 'टीबीएम' के जरिए किया जाएगा। इसके लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई मशीन जापान में बनाई जा रही है और तीन महीने में मुंबई पहुंच जाएगी। गुजरात में बुलेट ट्रेन का काम तेजी से चल रहा है। वहीं तस्वीर कुछ ऐसी है कि मुंबई बुलेट ट्रेन का काम तीन महीने से रुका हुआ है।

मुंबई: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में मुख्य सुरंग का काम 'टनल बोरिंग मशीन' या 'टीबीएम' के जरिए किया जाएगा। इसके लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई मशीन जापान में बनाई जा रही है और तीन महीने में मुंबई पहुंच जाएगी। गुजरात में बुलेट ट्रेन का काम तेजी से चल रहा है। वहीं तस्वीर कुछ ऐसी है कि मुंबई बुलेट ट्रेन का काम तीन महीने से रुका हुआ है।

रेल मंत्री ने निरीक्षण कर जताया संतोष
हमारे सहयोगी महाराष्ट्र टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का काम पूरा हो रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (बुलेट ट्रेन परियोजना) के तहत समुद्र के नीचे निर्माणाधीन सुरंग का शनिवार को निरीक्षण किया और परियोजना की प्रगति पर संतोष जताया। परियोजना के तहत 21 किलोमीटर लंबी सुरंग में ठाणे क्रीक के नीचे सात किलोमीटर का हिस्सा शामिल है। यह सुरंग बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) स्टेशन को शिलफाटा से जोड़ेगी। समुद्र के नीचे बनी यह सुरंग देश में अपनी तरह की पहली सुरंग है। वैष्णव ने संवाददाताओं से कहा कि समुद्र के नीचे सुरंग का डिजाइन तैयार कर लिया गया है और इसका निर्माण बड़ी सावधानी से किया जा रहा है।

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कहां अटका काम?
मुंबई बुलेट ट्रेन निर्माण योजना के अनुसार, दो टीबीएम यानी टनल बोरिंग मशीन अक्टूबर 2024 तक और तीसरी टीबीएम 2025 में आने की उम्मीद थी। पहले दो टीबीएम को दिसंबर 2024 तक घनसोली (सावली) से विक्रोली और विक्रोली से बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) तक मार्गों की खुदाई पूरी करनी थी। तीसरी टीबीएम का उत्खनन 2025 में किया जाना निर्धारित किया गया है।

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जापान से आएगी मशीन
एनएचएसआरसीएल के प्रबंध निदेशक विवेक कुमार गुप्ता ने कहा कि फिलहाल जापान में टीबीएम का निर्माण कार्य चल रहा है और मशीन दो से तीन महीने में आ जाएगी। बुलेट ट्रेन के लिए टीबीएम का आकार शहर की मेट्रो के लिए टीबीएम की तुलना में बड़ा होगा। मेट्रो के लिए लगभग 5-6 मीटर व्यास वाली टीबीएम का उपयोग किया जाता है। बुलेट ट्रेन के लिए 13.1 मीटर व्यास वाली टीबीएम का उपयोग किया जाएगा।

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कहां, कितनी खुदाई?
एफकॉन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर को बीकेसी और शिलफाटा के बीच 21 किलोमीटर लंबी सुरंग खोदने का ठेका दिया गया है। इसमें खाड़ी के नीचे सात किलोमीटर लंबी पानी के नीचे की सुरंग भी शामिल है। यह सुरंग जमीनी स्तर से 25 से 65 मीटर की गहराई पर होगी। इसका सबसे गहरा केंद्र पारसिक पर्वत के नीचे 114 मीटर की गहराई पर होगा।

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किस रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन?
रेल मंत्री ने कहा कि सुरंग के डिजाइन और इसमें इस्तेमाल की जा रही प्रौद्योगिकी की मदद से दो ट्रेनें 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजर सकती हैं। हवा और प्रकाश के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा गया है। परियोजना के 340 किलोमीटर लंबे हिस्से पर निर्माण कार्य अच्छी गति से चल रहा है।