नासिक : म्हाडा घोटाला... 59 बिल्डरों को नोटिस, मनपा की बड़ी कार्रवाई; अब जांच के घेरे में डेवलपर्स
Nashik: MHADA Scam... Notices Issued to 59 Builders; Major Action by Municipal Corporation; Developers Now Under Investigation
इस मामले में मनपा ने 59 विकासकों (डेवलपर्स) को नोटिस जारी किए हैं। तत्कालीन अधिकारियों द्वारा दी गई ले आउट मंजूरियां अब गहन जांच के घेरे में हैं। जांच में सामने आया है कि बिल्डरों ने म्हाडा के नियमों से बचने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची थी। नियमानुसार, एक निश्चित क्षेत्र से बड़े भूखंड पर म्हाडा के लिए घर देना अनिवार्य होता है। इस अनिवार्य शर्त को टालने के लिए बिल्डरों ने जमीन के बड़े टुकड़ों को एक एकड़ से कम के छोटे-छोटे ले-आउट में बांट दिया। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए भूमि अभिलेख विभाग की फर्जी मुहरों और हस्ताक्षरों का उपयोग किया गया।
नासिक : नासिक म्हाडा के साथ धोखाधड़ी कर गरीबों के घरों को हड़पने वाले बिल्डरों के खिलाफ नासिक महानगरपालिका (मनपा) ने अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में मनपा ने 59 विकासकों (डेवलपर्स) को नोटिस जारी किए हैं। तत्कालीन अधिकारियों द्वारा दी गई ले आउट मंजूरियां अब गहन जांच के घेरे में हैं। जांच में सामने आया है कि बिल्डरों ने म्हाडा के नियमों से बचने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची थी। नियमानुसार, एक निश्चित क्षेत्र से बड़े भूखंड पर म्हाडा के लिए घर देना अनिवार्य होता है। इस अनिवार्य शर्त को टालने के लिए बिल्डरों ने जमीन के बड़े टुकड़ों को एक एकड़ से कम के छोटे-छोटे ले-आउट में बांट दिया। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए भूमि अभिलेख विभाग की फर्जी मुहरों और हस्ताक्षरों का उपयोग किया गया।
इस घोटाले की गूंज अथ राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन तक पहुंच चुकी है। जांच का दायरा बढ़ने के बाद इसमें बिल्डरों के पार्टनर और जमीन मालिको के नाम भी शामिल किए गए है, जिससे आरोपियों की कुल संख्या 194 तक पहुंच गई है। भूमि अभिलेख विभाग ने पहले ही 49 विकासकों के खिलाफ सरकार वाडा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। इस पूरे प्रकरण में अब तक केवल एक आरोपी, सोनू मनवानी, की गिरफ्तारी हुई है।
अब तक 10 विकासकों से पूछताछ की जा चुकी है, जबकि अगले सप्ताह कुछ और बिल्डरी को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा, मनपा अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि नगर रचना विभाग ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इन ले-आउट्स को मंजूरी कैसे दी। इस मामले में नगर रचना विभाग के अधिकारी कल्पेश पाटिल द्वारा जांच समिति को पूरी जानकारी न दिए जाने के कारण विभाग की भूमिका पर संदेह और गहरा गया है।


