मुंबई में मानसून से पहले बड़ा अलर्ट: MHADA ने 82 बेहद खतरनाक Cessed Buildings चिन्हित कीं, रहवासियों को खाली करने की प्रक्रिया शुरू
Major alert before monsoon in Mumbai: MHADA identifies 82 highly dangerous caged buildings, begins process to evacuate residents
मुंबई में MHADA ने 82 बेहद खतरनाक cessed buildings की पहचान की। मानसून से पहले रहवासियों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू।
मुंबई में मानसून से पहले आवास सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई शुरू की गई है। MHADA ने शहर में 82 अत्यंत खतरनाक (Highly Dangerous) cessed buildings की पहचान की है और इनमें रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ये इमारतें मुख्य रूप से दक्षिण मुंबई और पुराने उपनगरीय इलाकों में स्थित हैं, जहां कई भवन दशकों पुराने हैं और उनकी संरचना कमजोर हो चुकी है। भारी बारिश के दौरान ऐसी इमारतों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
MHADA अधिकारियों ने बताया कि मानसून के दौरान किसी भी संभावित दुर्घटना से बचने के लिए निवासियों को समय रहते इमारतें खाली करने के नोटिस जारी किए जा रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुंबई में हर साल बरसात के दौरान पुराने और जर्जर भवनों के ढहने की घटनाएं सामने आती हैं। इसी वजह से MHADA और BMC द्वारा प्री-मानसून सर्वे किया जाता है, जिसमें खतरनाक इमारतों की सूची तैयार की जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई cessed buildings की उम्र 60 से 100 वर्ष के बीच है। लगातार नमी, कमजोर रखरखाव और संरचनात्मक क्षति के कारण इन भवनों में रहने वालों के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो जाता है।
MHADA ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित परिवारों को ट्रांजिट आवास या वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही पुनर्विकास परियोजनाओं को भी तेज करने पर जोर दिया जा रहा है ताकि पुराने भवनों की जगह सुरक्षित आवास तैयार किए जा सकें।
मुंबई में cessed buildings का मुद्दा लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। शहर में हजारों लोग अभी भी पुराने और जर्जर भवनों में रहते हैं, जहां मानसून के दौरान खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनकी इमारत को खतरनाक घोषित किया गया है तो वे सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और जोखिम न लें।
फिलहाल MHADA और BMC दोनों एजेंसियां मानसून से पहले संवेदनशील इलाकों पर विशेष निगरानी रख रही हैं ताकि किसी भी बड़े हादसे को रोका जा सके।


