मुंबई : कराची जा रहा था जहाज, ईरान ने होर्मुज में रोका, अब मुंबई की ओर रवाना, बीच में हो गया 'खेल'!
Mumbai: The ship was going to Karachi, Iran stopped it in Hormuz, now it is heading towards Mumbai, a 'game' happened in between!
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में इस वक्त दिलचस्प लड़ाई चल रही है. पाकिस्तान का एक जहाज ‘सेलेन’ खाने पीने का सामान लेकर कराची बंदरगाह के लिए रवाना हुआ था. लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने रोक दिया. अब खबर है कि पाकिस्तान का रास्ता छोड़ यह जहाज भारत के मुंबई बंदरगाह की ओर मुड़ गया है. इसके दो दिन बाद मुंबई पहुंचने की संभावना है. इस एक घटना ने पाकिस्तान के साथ ईरान के रिश्तों की पोल खोल दी है.
मुंबई : स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में इस वक्त दिलचस्प लड़ाई चल रही है. पाकिस्तान का एक जहाज ‘सेलेन’ खाने पीने का सामान लेकर कराची बंदरगाह के लिए रवाना हुआ था. लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने रोक दिया. अब खबर है कि पाकिस्तान का रास्ता छोड़ यह जहाज भारत के मुंबई बंदरगाह की ओर मुड़ गया है. इसके दो दिन बाद मुंबई पहुंचने की संभावना है. इस एक घटना ने पाकिस्तान के साथ ईरान के रिश्तों की पोल खोल दी है.
सेंट किट्स एंड नेविस के झंडे तले चल रहा यह जहाज 23 मार्च को यूएई के शारजाह से पाकिस्तान के कराची के लिए रवाना हुआ था. लेकिन जैसे ही यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दाखिल हुआ, ईरान की आईआरजीसी नेवी ने इसे घेर लिया. बताया कि इस जहाज के पास इस रास्ते से गुजरने के लिए पर्याप्त अनुमति नहीं थी. ईरान की समुद्री अथॉरिटी से बातचीत किए बिना कोई भी जहाज यहां से नहीं गुजर सकता. ईरान ने इसे कराची जाने से रोककर वापस मोड़ने पर मजबूर कर दिया.
ईरान की सख्ती के बाद इस जहाज ने अपना ठिकाना बदल लिया है. ताजा ट्रैकिंग डेटा वेसलफाइंडर और मरीनट्रैफिक के अनुसार, यह जहाज अब लगभग 10–11 नॉट्स की रफ्तार से मुंबई की ओर बढ़ रहा है. अनुमान है कि यह 9 अप्रैल तक भारत के तट पर पहुंच जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में जारी अनाज और खाद्य संकट के बीच इस जहाज का रास्ता बदलना इस्लामाबाद के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है.
‘बिना इजाजत पत्ता भी नहीं हिलेगा’
ईरान ने न्यूयॉर्क में अपने मिशन के जरिए स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज को ईरानी अधिकारियों के साथ कोआर्डिनेशन करना होगा. ‘सेलेन’ का कराची न जा पाना इसी सख्त नीति का नतीजा है.


