मुंबई : मुंबई पुलिस के एंटी टेररिज्म सेल के API समेत 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड, अवैध बांग्लादेशियों की तलाशी की थी जिम्मेदारी
Mumbai: Four policemen, including an API of the Mumbai Police's Anti-Terrorism Cell, have been suspended for searching illegal Bangladeshis.
मुंबई पुलिस के एंटी टेररिज्म सेल (एटीसी) से जुड़े चार पुलिसकर्मियों को छापेमारी के दौरान कथित चोरी और वसूली के गंभीर आरोपों के बाद सस्पेंड कर दिया गया। इस मामले में तीन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार भी किया गया है। इनमें एक एपीआई हैं। पुलिस के अनुसार,आरोपी एपीआई विजय सुतार, सिपाही योगेश खंडके, धनश्री रामचंद्र मोरे और रविंद्र नेमाने आरसीएफ पुलिस स्टेशन के एटीसी से जुड़े थे। इस टीम को इलाके में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की तलाश के लिए अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
मुंबई : मुंबई पुलिस के एंटी टेररिज्म सेल (एटीसी) से जुड़े चार पुलिसकर्मियों को छापेमारी के दौरान कथित चोरी और वसूली के गंभीर आरोपों के बाद सस्पेंड कर दिया गया। इस मामले में तीन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार भी किया गया है। इनमें एक एपीआई हैं। पुलिस के अनुसार,आरोपी एपीआई विजय सुतार, सिपाही योगेश खंडके, धनश्री रामचंद्र मोरे और रविंद्र नेमाने आरसीएफ पुलिस स्टेशन के एटीसी से जुड़े थे। इस टीम को इलाके में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की तलाश के लिए अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
5 लाख रुपये की वसूली भी की
आरोप है कि इस कार्रवाई के दौरान एक महिला के घर छापेमारी करते समय इन पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर उनके घर से नकदी और सोने के आभूषण चुरा लिए। इसके अलावा आरोप है कि इन्होंने कल्याण में रहने वाली एक संदिग्ध बांग्लादेशी महिला को कार्रवाई का डर दिखाकर उससे करीब 5 लाख रुपये की वसूली भी कर लिए। इसकी जानकारी आरोपी महिलाओं के रिश्तेदारों द्वारा स्थानीय एक सामाजिक कार्यकर्ता की मिली, जिन्होंने इसकी शिकायत जोनल डीसीपी समीर शेख से की।
कौन-कौन अरेस्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए शेख ने जांच के आदेश दिए और प्रारंभिक जांच में आरोपों में सच्चाई पाए जाने पर कार्रवाई करते हुए एपीआई विजय सुतार, सिपाही योगेश खंडके और धनश्री मोरे को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद नियमों के अनुसार, तीनों को डिम्ड सस्पेंशन में डाल दिया गया और मामले की जांच चेंबूर पुलिस स्टेशन को सौंप दी गई। बता दें कि इन सभी आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरसीएफ पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 305(ए), 308(2), 351(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज है।


