परेल स्थित ग्लोबल अस्पताल पर सरकार की सख्त कार्रवाई... एफएसआई छूट वापस लेने की तैयारी
Government Takes Strict Action Against Global Hospital in Parel... Preparing to Revoke FSI Exemptions
सरकार ने अस्पताल की तीसरी विंग के निर्माण की अनुमति देने से इनकार कर दिया है और करीब 4,700 वर्ग मीटर क्षेत्र के निर्माण पर स्थगन लगा दिया गया है। इसके अलावा, अस्पताल के कुछ मंजिलों को अभी तक उपयोग प्रमाणपत्र (ओसी) नहीं दिया गया है। सरकार ने अस्पताल की ऊपरी दो मंजिलों को अपने कब्जे में लेने का निर्णय लिया है। साथ ही बाकी निर्माण कार्य को भी अनुमति न देने का फैसला किया गया है और जरूरत पड़ने पर संबंधित मंजिलों को अपने नियंत्रण में लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मुंबई : परेल स्थित ग्लोबल अस्पताल द्वारा गरीब मरीजों के लिए आरक्षित 15 प्रतिशत बेड उपलब्ध न कराने के मामले में राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। विधानसभा में राज्यमंत्री माधुरी मिसाळ ने जानकारी देते हुए बताया कि अस्पताल को दी गई अतिरिक्त फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) की सुविधा वापस ली जाएगी। साथ ही अस्पताल के खिलाफ अन्य प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा रही है। यह मुद्दा विधायक अजय चौधरी, योगेश सागर और अनंत (बाला) नर द्वारा विधानसभा में उठाया गया था। उन्होंने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए बताया कि अस्पताल ने महानगरपालिका के निर्माण नियमों का उल्लंघन किया है और पिछले 15 वर्षों से गरीब मरीजों के लिए निर्धारित 15 प्रतिशत बेड उपलब्ध नहीं कराए हैं।
जानकारी के अनुसार, अस्पताल को मंजूरी देते समय यह शर्त रखी गई थी कि वह महानगरपालिका के निर्धारित दरों पर 15 प्रतिशत बेड गरीब मरीजों के लिए आरक्षित रखेगा। लेकिन जांच में पाया गया कि अस्पताल इस शर्त का पालन नहीं कर रहा है। इस कारण पहले अस्पताल के नवीनीकरण पर रोक लगाई गई थी, हालांकि बाद में न्यायालय के आदेश के बाद नवीनीकरण की अनुमति दी गई।
सरकार ने अस्पताल की तीसरी विंग के निर्माण की अनुमति देने से इनकार कर दिया है और करीब 4,700 वर्ग मीटर क्षेत्र के निर्माण पर स्थगन लगा दिया गया है। इसके अलावा, अस्पताल के कुछ मंजिलों को अभी तक उपयोग प्रमाणपत्र (ओसी) नहीं दिया गया है। सरकार ने अस्पताल की ऊपरी दो मंजिलों को अपने कब्जे में लेने का निर्णय लिया है। साथ ही बाकी निर्माण कार्य को भी अनुमति न देने का फैसला किया गया है और जरूरत पड़ने पर संबंधित मंजिलों को अपने नियंत्रण में लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मंत्री माधुरी मिसाळ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में यदि किसी पालिका अधिकारी की भूमिका पाई जाती है तो नगर विकास विभाग के सचिव के माध्यम से उनकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।


