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मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे पर साइनबोर्ड तोड़फोड़ का मामला, भाषा विवाद ने पकड़ा तूल

मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे पर साइनबोर्ड तोड़फोड़ का मामला, भाषा विवाद ने पकड़ा तूल पालघर में मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे पर लगे साइनबोर्ड की तोड़फोड़ का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने हिंदी को प्राथमिकता दिए जाने का विरोध करते हुए बोर्ड को नुकसान पहुंचाया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। #Palghar #MumbaiVadodaraExpressway #Marathi #Hindi #MaharashtraNews #BreakingNews #LanguageRow #MumbaiNews
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मलबार हिल में गुजराती नेम बोर्ड हटाए गए, मनसे की शिकायत के बाद BMC की कार्रवाई

मलबार हिल में गुजराती नेम बोर्ड हटाए गए, मनसे की शिकायत के बाद BMC की कार्रवाई मुंबई के मलबार हिल इलाके में गुजराती भाषा के नेम बोर्डों को BMC ने हटा दिया है। यह कार्रवाई मनसे की शिकायत के बाद की गई। मामले ने मुंबई में भाषा और साइनज नियमों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। #MumbaiNews #MalabarHill #BMC #MNS #Marathi
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सभी स्कूलों में कम से कम चार साल के लिए मराठी भाषा विषय को अनिवार्य बनाने की सिफारिश...

सभी स्कूलों में कम से कम चार साल के लिए मराठी भाषा विषय को अनिवार्य बनाने की सिफारिश... भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे की अध्यक्षता वाली एक समिति ने नीति तैयार कर राज्य सरकार को सौंपी थी। नीति में मराठी संरक्षण के लिए 25 साल का मास्टर प्लान, महाराष्ट्र राज्य सांस्कृतिक भवन का निर्माण; आदिवासी जिलों में लोक कला अनुसंधान और संरक्षण केंद्र स्थापित करना और महाराष्ट्र लोक कला गैलरी का निर्माण करना; सभी बंद पड़े थिएटरों को फिर से शुरू करना और थिएटर से जुड़े मुद्दों के लिए विधायक निधि के इस्तेमाल की अनुमति देना; सभी बोर्डों के स्कूलों में शास्त्रीय नृत्य का पीरियड शुरू करना; सिंगल स्क्रीन फिल्म थिएटरों को पुनर्जीवित करना; स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में संतों के साहित्य को शामिल करना और राज्य की धार्मिक संस्कृति पर वृत्तचित्र बनाना।
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...अब सीएम शिंदे ने दिलाया ये भरोसा, मराठी भाषा में पढ़ाई की वजह से रिजेक्ट हुए थे 252 अभ्यर्थी

...अब सीएम शिंदे ने दिलाया ये भरोसा, मराठी भाषा में पढ़ाई की वजह से रिजेक्ट हुए थे 252 अभ्यर्थी मुंबई में प्राथमिक और माध्यमिक नागरिक-संचालित स्कूलों में प्रोबेशनरी सहायक स्कूल शिक्षकों के रूप में नौकरी चाहने वाले 252 युवाओं को उम्मीद की किरण नजर आई है. दरअसल इन्हें तीन साल पहले कथित तौर पर बीएमसी द्वारा खारिज कर दिया गया था क्योंकि उनकी प्राथमिक शिक्षा अंग्रेजी में न होकर मराठी में थी.
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