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Read More... नई दिल्ली : आयुध कारखानों के 59000 रक्षा कर्मियों पर लटकी तलवार, कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी पर नजर
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आयुध कारखानों के सभी मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच, यूनाइटेड फोरम ऑफ ऑर्डनेंस एम्प्लॉइज (यूएफओई) ने कैबिनेट सचिव और प्रमुख मंत्रालयों के वरिष्ठ सचिवों से औपचारिक रूप से संपर्क करके सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। यूएफओई ने आयुध कारखानों के सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) में निगमीकरण के बाद लगभग 59,000 रक्षा नागरिक कर्मचारियों के सेवा दर्जे की सुरक्षा की मांग की है। यूएफओई, जो नवगठित डीपीएसयू में अनिवार्य समायोजन का विरोध कर रहा है, ने मांग की है कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित सचिवों की प्रस्तावित समिति एक सरकारी अधिसूचना जारी करने की सिफारिश करे। इसमें कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति तक प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के रूप में बने रहने की अनुमति दी जाए। नई दिल्ली : एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के बचे दो स्क्वाड्रनों को 2026-27 तक भारत को देगा रूस
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रूस ने आश्वासन दिया है कि वह एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के बचे दो स्क्वाड्रनों को 2026-27 तक भारत को दे देगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसी एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान को जमकर धूल चटाई थी। एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के चौथे और पांचवें स्क्वाड्रन की डिलीवरी में रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से देरी हुई। हाल में चीन के किंगदाओ में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान राजनाथ सिंह और एंड्री बेलौसेव के बीच इसको लेकर द्विपक्षीय बैठक में चर्चा हुई। नई दिल्ली: सरकार ने डिफेंस एक्सपोर्ट में लगाई लंबी छलांग, अमेरिका और फ्रांस जैसे देश बने खरीदार
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भारत के डिफेंस क्षेत्र में 2014 के बाद से उल्लेखनीय बदलाव आया है, जो कि बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर सैन्य बल से विकसित होकर, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पादन पर केंद्रित हो गया है. वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत सैन्य शक्तियों में से एक के रूप में भारत क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने और रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. नई दिल्ली : रिलायंस डिफेंस और जर्मनी की कंपनी राइनमेटल ने गोला-बारूद बनाने के लिए रणनीतिक सहयोग समझौता किया
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भारतीय कंपनी रिलायंस डिफेंस और जर्मनी की कंपनी राइनमेटल ने गोला-बारूद बनाने के लिए रणनीतिक सहयोग समझौता किया है। यह साझेदारी भारत की रक्षा निर्माण क्षमताओं को मजबूत करेगी। इससे 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य का प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी। 
