धारावी पुनर्विकास प्रोजेक्ट: नए नियम से ऊपरी मंजिल के रहवासियों की पात्रता पर असर, जानें क्या बदला
Dharavi Redevelopment Project: New rules impact eligibility of upper floor residents, find out what changed
धारावी पुनर्विकास प्रोजेक्ट (DRP) को लेकर एक नया नियम सामने आया है, जिससे ऊपरी मंजिल (upper floor) पर रहने वाले कई परिवारों की पात्रता प्रभावित हो सकती है। सरकार द्वारा जारी नए प्रावधान के अनुसार, अब इन रहवासियों की पात्रता आंशिक रूप से ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले लोगों की पात्रता पर निर्भर करेगी।
मुंबई: मुंबई के धारावी पुनर्विकास प्रोजेक्ट (DRP) को लेकर एक नया नियम सामने आया है, जिससे ऊपरी मंजिल (upper floor) पर रहने वाले कई परिवारों की पात्रता प्रभावित हो सकती है। सरकार द्वारा जारी नए प्रावधान के अनुसार, अब इन रहवासियों की पात्रता आंशिक रूप से ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले लोगों की पात्रता पर निर्भर करेगी।
इस योजना के तहत उन ऊपरी मंजिल के परिवारों को लाभ दिया जाएगा, जो 15 नवंबर 2022 से पहले वहां रहने का प्रमाण दे सकें। पात्र पाए जाने वाले परिवारों को मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में लगभग 300 वर्गफुट के घर दिए जाएंगे।
हालांकि, सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अगर कोई व्यक्ति अपने दावे के लिए केवल हलफनामा (affidavit) देता है, तो उसे तभी मान्य किया जाएगा जब उसी इमारत के ग्राउंड फ्लोर निवासी भी पात्र पाए जाएं। यदि ग्राउंड फ्लोर निवासी अयोग्य ठहरते हैं, तो ऊपरी मंजिल के आवेदकों का दावा भी खारिज हो सकता है।
पात्रता तय करने के लिए सरकार ने दस्तावेजों की एक प्राथमिकता सूची भी तय की है। इसमें सबसे ऊपर बिजली बिल, उसके बाद रजिस्टर्ड रेंट या खरीद एग्रीमेंट और फिर सरकारी पहचान पत्र शामिल हैं। हलफनामा सबसे निचले स्तर पर रखा गया है, जिससे कई लोगों को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।
इस नीति को पहले की स्लम पुनर्वास योजनाओं से अलग माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पहली बार ऊपरी मंजिल के रहवासियों को भी शामिल किया गया है। हालांकि, ग्राउंड फ्लोर पर निर्भरता की शर्त को लेकर कुछ लोगों ने चिंता भी जताई है कि इससे कई पात्र परिवार बाहर हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, धारावी पुनर्विकास प्रोजेक्ट को अधिक समावेशी बनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन नए नियमों के चलते पात्रता प्रक्रिया और जटिल हो गई है, जिससे हजारों परिवारों पर इसका असर पड़ सकता है।


