मुंबई : सड़क हादसा मामलों में तेज न्याय के लिए ट्रिब्यूनल पर विचार की सलाह

Mumbai: Advice to consider tribunal for speedy justice in road accident cases

मुंबई : सड़क हादसा मामलों में तेज न्याय के लिए ट्रिब्यूनल पर विचार की सलाह

बॉम्बे हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा मिलने में होने वाली लंबी देरी पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से एक विशेष अपील ट्रिब्यूनल बनाने पर विचार करने को कहा है। अदालत ने कहा कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम मामलों के तेजी से निपटारे के लिए एक मजबूत और प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता है, ताकि पीड़ितों को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े।

मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा मिलने में होने वाली लंबी देरी पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से एक विशेष अपील ट्रिब्यूनल बनाने पर विचार करने को कहा है। अदालत ने कहा कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम मामलों के तेजी से निपटारे के लिए एक मजबूत और प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता है, ताकि पीड़ितों को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े। यह टिप्पणी जस्टिस जितेंद्र जैन ने एक मामले की सुनवाई के दौरान की, जब उन्होंने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल  द्वारा दिए गए 74,422 रुपये के मुआवजे के खिलाफ द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि ऐसे छोटे मुआवजा मामलों में भी वर्षों तक अपील और प्रक्रिया के कारण देरी होना पीड़ितों के लिए न्याय में बाधा बनता है।

 

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सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में पीड़ित और उनके परिवार पहले ही मानसिक, शारीरिक और आर्थिक नुकसान झेलते हैं, ऐसे में न्याय मिलने में देरी उनकी कठिनाइयों को और बढ़ा देती है। अदालत ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए केंद्र सरकार से सुझाव दिया कि एक विशेष अपील ट्रिब्यूनल बनाया जाए, जो केवल मोटर एक्सीडेंट क्लेम मामलों की सुनवाई करे और उन्हें तेजी से निपटाए। कोर्ट ने यह भी माना कि मौजूदा प्रणाली में कई स्तरों पर अपील की प्रक्रिया होने के कारण मामलों के निपटारे में काफी समय लग जाता है। इसी वजह से पीड़ितों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाता, जो उनके पुनर्वास के लिए बेहद जरूरी होता है।

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इस मामले में इंश्योरेंस कंपनी द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए अदालत ने ट्रिब्यूनल के निर्णय को सही माना और कहा कि मुआवजा तय करने में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है। अदालत की इस टिप्पणी के बाद अब इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि क्या मोटर एक्सीडेंट क्लेम मामलों के लिए अलग से अपील ट्रिब्यूनल बनाना मौजूदा व्यवस्था को बेहतर बना सकता है।

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कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसा ट्रिब्यूनल बनता है तो इससे लंबित मामलों की संख्या में कमी आ सकती है और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा। फिलहाल इस सुझाव पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। यह मामला देश में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए न्याय प्रणाली को अधिक तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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