कमाठीपुरा की नई तस्वीर, जर्जर इमारतों की जगह लेंगे आलीशान टावर; मिटेगा दशकों पुराना 'कलंक'

Kamathipura's new image: swanky buildings will be replaced by stately towers; decades-old stigma will be erased.

कमाठीपुरा की नई तस्वीर, जर्जर इमारतों की जगह लेंगे आलीशान टावर; मिटेगा दशकों पुराना 'कलंक'

कमाठीपुरा के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। इस इलाके की मशहूर 15 गलियां (लेन) अब सिमटकर छह से आठ चौड़ी गलियों में बदल जाएंगी, और ज्यादातर गलियों के नाम भी बदल जाएंगे। यहां सिर्फ कुछ ही जगहों पर 'कमाठीपुरा' नाम दिखाई देगा, जबकि एक बगीचा और एक म्यूरल इसकी कहानी को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजकर रखेंगे। यह कहानी मुंबई की पहचान का एक जटिल, फिर भी अहम हिस्सा है। 

मुंबई : कमाठीपुरा के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। इस इलाके की मशहूर 15 गलियां (लेन) अब सिमटकर छह से आठ चौड़ी गलियों में बदल जाएंगी, और ज्यादातर गलियों के नाम भी बदल जाएंगे। यहां सिर्फ कुछ ही जगहों पर 'कमाठीपुरा' नाम दिखाई देगा, जबकि एक बगीचा और एक म्यूरल इसकी कहानी को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजकर रखेंगे। यह कहानी मुंबई की पहचान का एक जटिल, फिर भी अहम हिस्सा है। 

 

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अपने विवादित अतीत को देखते हुए, कई निवासी चाहते हैं कि कमाठीपुरा अपनी पुरानी 'रेड-लाइट डिस्ट्रिक्ट' वाली पहचान को पीछे छोड़ दे। जैसे-जैसे यहां पुनर्निर्माण का काम आगे बढ़ रहा है, स्थानीय लोग अपने विधायक अमीन पटेल से मिलकर यह गुजारिश कर रहे हैं कि, इस इलाके के नाम और इसकी छवि को बदला जाए। हालांकि, नागरिकों का एक तबका यह भी मानता है कि मुंबई के इतिहास में इस इलाके की जो जगह है, उसे सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

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34 एकड़ में फैली है 15 संकरी गलियां
दरअसल, ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण इस इलाके का बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण होने जा रहा है। 'मुंबई बिल्डिंग रिपेयर्स एंड रिकंस्ट्रक्शन बोर्ड' (MBRRB) ने लगभग 8000 निवासियों के लिए स्थायी और सुरक्षित घरों का निर्माण करने की योजना बनाई है, इसके साथ ही लगभग 800 जमीन मालिकों को मुआवजा देने का भी प्रस्ताव रखा है।

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मजदूरी करने आए लोगों को सबसे पहले बसाया गया था
इतिहासकारों की माने तो कमाठीपुरा को पुराने 'फोर्ट' इलाके के उत्तरी छोर के पास स्थित एक दलदली जमीन पर बसाया गया था। यहां सबसे पहले तेलुगू भाषी प्रवासी आकर बसे थे, जिन्हें 'कामाठी' कहा जाता था; ये लोग निर्माण-कार्य में मजदूरों के तौर पर काम करते थे। बाद में, जैसे-जैसे मिलों और बंदरगाह से जुड़ी गतिविधियों में तेजी आई, यहां के कई निवासी औद्योगिक क्षेत्र में काम करने लगे। समय के साथ, यहां यौन-कर्म का धंधा भी पनपने लगा, और कमाठीपुरा मुंबई के सबसे बड़े 'रेड-लाइट डिस्ट्रिक्ट' के तौर पर जाना जाने लगा। 

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विधायक ने संतुलन बनाने की बात कही
क्षेत्र के विधायक अमीन पटेल की माने तो, जैसे ही पुनर्निर्माण का डिजाइन और लेआउट (नक्शा) पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। वह सभी जन-प्रतिनिधियों जिनमें नगर निगम के पार्षद भी शामिल हैं, उनको विश्वास में लेंगे। इसके अलावा, वह स्थानीय विशेषज्ञों से भी सलाह-मशविरा करेंगे; इन विशेषज्ञों ने इस इलाके का बारीकी से अध्ययन किया है। उन लोगों की पहचान की है, जिन्होंने इस इलाके के विकास में अपना योगदान दिया है, ताकि गलियों के नाम उन्हीं लोगों के नाम पर रखे जा सकें।

इसके साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि यहां एक बगीचा भी विकसित किया जाएगा। जिसमें कमाठीपुरा के इतिहास को दर्शाने वाले म्यूरल और लिखित विवरण मौजूद होंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस इलाके के महत्व को भली-भांति समझ सकें। हालांकि, कांग्रेस विधायक ने ज़ोर देकर कहा कि इस इलाके की उत्तर और दक्षिण दिशा वाली मुख्य सड़कों के नाम वही रहेंगे, और अगर कोई नाम बदला जाएगा, तो वह सिर्फ अंदरूनी गलियों का ही होगा।