मुंबई के 'स्पेयर पार्ट्स' वाले खेल में 10 करोड़ की सेंधमारी: पुलिस फाइल में अटकी अनुमति, आरोपियों ने चली चाल

10 crore rupees stolen from Mumbai's spare parts business: Permission stuck in police file, accused use trick

मुंबई के 'स्पेयर पार्ट्स' वाले खेल में 10 करोड़ की सेंधमारी: पुलिस फाइल में अटकी अनुमति, आरोपियों ने चली चाल

बोगस फर्म बनाकर 10.78 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) हड़पने के मामले में मुंबई की चार फर्म ट्रेस कर लीं, लेकिन इनके मालिकों तक नहीं पहुंच सकी। इसका फायदा उठाते हुए आरोपितों ने महाराष्ट्र हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर कर दी, लेकिन यहां से टीम को मुंबई जाने के लिए अब तक डीआइजी की अनुमति नहीं मिल सकी। 

 

मुंबई : बोगस फर्म बनाकर 10.78 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) हड़पने के मामले में मुंबई की चार फर्म ट्रेस कर लीं, लेकिन इनके मालिकों तक नहीं पहुंच सकी। इसका फायदा उठाते हुए आरोपितों ने महाराष्ट्र हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर कर दी, लेकिन यहां से टीम को मुंबई जाने के लिए अब तक डीआइजी की अनुमति नहीं मिल सकी। 

 

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अभी तक मुंबई की जिन चार फर्मों के नाम सामने आए हैं उनमें सिद्धि विनायक, राज ट्रेडर्स, गुुुरु ट्रेडर्स व सर्व साल्यूशन शामिल हैं। इन चारों फर्म ने 45 करोड़ 40 लाख रुपये का स्पेयर पार्ट्स का व्यापार दर्शाया था। इनके बिल लगाकर दस करोड़ 70 लाख का आइटीसी लाभ ले लिया था। जब जांच हुई तो पता चला न तो कोई व्यापार किया ही नहीं गया। जिन फर्मों से माल खरीदना दर्शाया गया था, उनके जीएसटी पंजीयन व लगाए गए बिल फर्जी पाए गए। मुंबई जाकर आरोपितों के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाने व उनकी गिरफ्तारी के संबंध में टीम भेजने के लिए डीआइजी बरेली के कार्यालय में अनुमति के लिए पत्र भेजा गया था।

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मगर अब तक उस पर स्वीकृति नहीं मिली है। जिस कारण आरोपितों को बचाव का पूरा समय मिल रहा है। पुलिस को जानकारी मिली है उसमें पता चला है कि आरोपित हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर कर चुके हैं। हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिलने पर पुलिस बहुत ज्यादा कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं होगी।

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यह है पूरा मामला
रोजा की लोकविहार कालोनी में मई 2025 में सिंह इंटरप्राइजेज नाम से बोगस फर्म पकड़ी गई थी। इटावा निवासी छात्र मंदीप सिह के नाम पर बनी इस फर्म से व्यापार दिखाकर 10.78 लाख की आइटीसी चोरी पकड़ी गई थी। पांच दिसंबर 2025 को रोजा पुलिस ने इस मामले में गिरोह के सरगना दिल्ली निवासी गौरव यादव, दीपक व सिद्धार्थ पांडेय को गिरफ्तार किया था। ये तीनों लोग इंटरनेट मीडिया पर नौकरी के विज्ञापन निकालकर बेरोजगारों के अभिलेख हासिल करते और उन्हीं अभिलेखों से बोगस फर्म बना देते थे।

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इस प्रकरण में तीन माह पूर्व 13 जनवरी को गाजियाबाद निवासी यस बैंक के शाखा संजीव गुप्ता व अमेठी निवासी वरुण शर्मा को पकड़ा गया था। संजीव आरोपितों से बोगस फर्म खरीदकर मुंबई व अन्य राज्यों में लोगों को बेचता था। इसमें उसे आर्थिक लाभ होता था।