मुंबई: काउंटिंग तक जारी रहेगी शराब बंदी, बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
Mumbai: Liquor ban to continue till counting of votes, Bombay High Court refuses to grant relief
बीएमसी चुनाव को देखते हुए मुंबई में शराब की बिक्री पर रोक जारी रहेगी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सरकारी प्रतिबंध को चुनौती देने वाली शराब विक्रेताओं की एसोसिएशन को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। सरकार ने शहर में 14 से 16 जनवरी तक शराब की बिक्री पर रोक लगाई है, जिसमें 15 जनवरी को वोटिंग और 16 जनवरी को काउंटिंग होनी है।
मुंबई: बीएमसी चुनाव को देखते हुए मुंबई में शराब की बिक्री पर रोक जारी रहेगी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सरकारी प्रतिबंध को चुनौती देने वाली शराब विक्रेताओं की एसोसिएशन को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। सरकार ने शहर में 14 से 16 जनवरी तक शराब की बिक्री पर रोक लगाई है, जिसमें 15 जनवरी को वोटिंग और 16 जनवरी को काउंटिंग होनी है।
16 जनवरी तक जारी रहेगी शराब बंदी
एसोसिएशन ऑफ प्रोग्रेसिव रिटेल लिकर वेंडर्स ने जनप्रतिनिधित्व एक्ट, 1951 की धारा 135-सी को नगर निगम चुनावों पर लागू करने को चुनौती दी थी। कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि नियमों को चुनौती देने के लिए गहन अध्ययन की जरूरत है। महाराष्ट्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि यह प्रतिबंध नगर निगम चुनावों के कारण लगाया गया है और 16 जनवरी को नतीजों की घोषणा के तुरंत बाद हटा लिया जाएगा। अतिरिक्त सरकारी वकील प्रियंका चव्हाण ने कहा कि वार्ड स्तर के नगर निगम चुनावों में वोटों की गिनती में आमतौर पर केवल दो से तीन घंटे लगते हैं, इसलिए 16 जनवरी को पूरे दिन प्रतिबंध नहीं रहेगा।
'प्रतिबंध केवल वोटिंग के घंटों तक होना चाहिए'
याचिकाकर्ता एसोसिएशन की ओर से पेश हुए वकील ने तर्क दिया कि लगभग ढाई दिनों का यह लंबा प्रतिबंध लाइसेंसी शराब विक्रेताओं को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि 14 जनवरी को न तो कोई प्रचार हो रहा है और न ही मतदान, ऐसे में यह प्रतिबंध अनावश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि यह रोक केवल वोटिंग के घंटों तक सीमित होनी चाहिए। उन्होंने पहले के हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला दिया, जिनमें मतदान से एक दिन पहले शराब की बिक्री की अनुमति दी गई थी और मतगणना पूरी होने के बाद फिर से शुरू कर दी गई थी। उन्होंने जनप्रतिनिधित्व एक्ट, 1951 की धारा 135-C की नगर निगम चुनावों पर लागू होने की वैधता पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि यह प्रावधान स्थानीय निकाय चुनावों पर लागू नहीं होना चाहिए।
कोर्ट ने प्रतिबंध पर रोक लगाने से किया इनकार
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, शराब की बिक्री पर तीन दिनों के लिए लगाए गए सरकारी प्रतिबंध पर अंतरिम रोक लगाने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नियमों को चुनौती देने के लिए विस्तृत जांच की आवश्यकता है और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि इस चुनौती पर केवल तभी विचार किया जा सकता है जब कानून में आज जो नियम है वह मनमाना हो और व्यावसायिक गतिविधियों और पेशे और व्यवसाय के अधिकारों पर बाधाएं पैदा करते हों। कोर्ट ने दोनों पक्षों को मार्च से पहले अपने जवाब और प्रत्युत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया है।


