मुंबई : ठाकरे परिवार के साथ आने में कोई हताशा नहीं: आदित्य ने बीएमसी चुनाव को मुंबई की पहचान बचाने की लड़ाई बताई
Mumbai: No desperation in aligning with Thackeray family: Aditya describes BMC elections as a fight to save Mumbai's identity
मुंबई के हाई-प्रोफाइल नगर निगम चुनाव के लिए जैसे-जैसे प्रचार तेज हो रहा है, वैसे-वैसे शहर की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का श्रेय लेने को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखी लड़ाई चल रही है. शिवसेना (यूबीटी) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह उन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का श्रेय ले रही है, जिनकी शुरुआत पिछली सरकार ने की थी.
मुंबई : मुंबई के हाई-प्रोफाइल नगर निगम चुनाव के लिए जैसे-जैसे प्रचार तेज हो रहा है, वैसे-वैसे शहर की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का श्रेय लेने को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखी लड़ाई चल रही है. शिवसेना (यूबीटी) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह उन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का श्रेय ले रही है, जिनकी शुरुआत पिछली सरकार ने की थी.
आदित्य ठाकरे ने दिप्रिंट को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अटल सेतु, कोस्टल रोड, बीडीडी चॉल पुनर्विकास परियोजनाएं, मेट्रो लाइनें और गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड जैसे कई काम उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शुरू और लागू किए गए थे, जबकि बीजेपी ने सिर्फ “रिबन काटे”. “मुझे एक भी फोटो दिखाइए, जिसमें बीजेपी ने कोई प्रोजेक्ट किया हो. दरअसल, बीजेपी ने कोस्टल रोड के भूमिपूजन का बहिष्कार किया था, क्योंकि यह उद्धव ठाकरे ने किया था. उन्होंने इसलिए किया, क्योंकि यह हमारा प्रोजेक्ट था,” आदित्य ने कहा. उन्होंने आगे कहा, “बीजेपी ने इन प्रोजेक्ट्स में बस रिबन काटने का काम किया, क्योंकि उन्होंने हमारी सरकार गिरा दी और उन्हें किस्मत से यह मौका मिल गया.”
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को एक रैली में आदित्य के आरोपों को खारिज किया. “कुछ लोग यहां यह कहने आए हैं कि उन्होंने मुंबई में बुनियादी ढांचा परियोजनाएं बनाई हैं. लेकिन ये पब्लिक है, सब जानती है. अगर आप आधी रात को भी किसी मुंबईकर को जगा दें और पूछें कि कोस्टल रोड, बीडीडी चॉल पुनर्विकास और मेट्रो लाइन किसने बनाई, तो वह कहेगा कि यह महायुति ने किया है,” उन्होंने कहा.
करो या मरो की स्थिति
बहुप्रतीक्षित बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव 15 जनवरी को होंगे और अगले दिन मतगणना होगी. तीन साल बाद हो रहे इन चुनावों को लेकर सभी दलों के बीच कड़ी टक्कर है, क्योंकि बीएमसी देश की सबसे अमीर नगर निकाय है, जिसका बजट 74,000 करोड़ रुपये से अधिक है, और जिस पार्टी का उस पर नियंत्रण होगा, उसे जबरदस्त राजनीतिक और आर्थिक ताकत मिलेगी.
पिछले 25 सालों तक बीएमसी पर अविभाजित शिवसेना का शासन रहा, बीजेपी उसके साथ सत्ता में रही, सिवाय 2017 से 2022 के कार्यकाल के, जब बीजेपी और शिवसेना अलग-अलग चुनाव लड़ी थीं. उस समय 227 सदस्यीय निगम में बीजेपी को 82 सीटें और शिवसेना को 84 सीटें मिली थीं. लेकिन अब शिवसेना के विभाजन के बाद बीजेपी को बीएमसी पर कब्जा करने की अच्छी संभावना दिख रही है.
इस बार मुकाबले ने नया रूप ले लिया है. मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन, जिसमें एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का धड़ा और बीजेपी शामिल हैं, और उद्धव ठाकरे की शिवसेना तथा राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेतृत्व वाले फिर से सक्रिय विपक्षी गठबंधन के बीच है. शहर में कमजोर हो चुकी ठाकरे खेमे की ताकत अब साझा ‘मराठी मानूस’ के मुद्दे पर प्रचार कर रही है, ताकि क्षेत्रीय समर्थन को एकजुट किया जा सके. बीएमसी चुनाव मुंबई में ठाकरे विरासत की बड़ी परीक्षा होंगे.


