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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का काम तेज, समुद्र के नीचे दूसरी टीबीएम ने भी शुरू की सुरंग की खोदाई

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का काम तेज, समुद्र के नीचे दूसरी टीबीएम ने भी शुरू की सुरंग की खोदाई मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रही है। इस कड़ी में महाराष्ट्र में ठाणे क्रीक (संकरी समुद्री खाड़ी) के नीचे रेल सुरंग बनाने के लिए दूसरी टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) ने खोदाई का काम शुरू कर दिया। इस काम को अंजाम दे रही नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने यह जानकारी दी। इसके मुताबिक, टीबीएम ने सावली (घंसोली) से विक्रोली की ओर खोदाई का काम शुरू किया। यह बुलेट ट्रेन परियोजना के 10 किलोमीटर लंबे भूमिगत हिस्से का भाग है, जिसमें सात किलोमीटर का सबसे अहम हिस्सा ठाणे क्रीक के समुद्र तल के नीचे बनेगा। यह किसी भी रेल गलियारे के लिए देश की पहली समुद्र के नीचे बनी सुरंग होगी।
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Maharashtra 

मुंबई : कंस्ट्रक्शन सेक्टर को राहत, खुदाई रॉयल्टी माफ और नॉन-एग्रीकल्चरल परमिशन ऑनलाइन ₹ 83.7 6 

 मुंबई : कंस्ट्रक्शन सेक्टर को राहत, खुदाई रॉयल्टी माफ और नॉन-एग्रीकल्चरल परमिशन ऑनलाइन ₹ 83.7 6  कंस्ट्रक्शन सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए, महाराष्ट्र के रेवेन्यू मिनिस्टर चंद्रशेखर बावनकुले ने खुदाई की रॉयल्टी माफ करने और नॉन-एग्रीकल्चरल परमिशन प्रोसेस को डिजिटाइज़ करने जैसे बड़े सुधारों का ऐलान किया है। ये फैसले मंत्रालय में क्रेडाई के रिप्रेजेंटेटिव के साथ हुई मीटिंग में लिए गए। नई पॉलिसी के अनुसार, अगर कंस्ट्रक्शन के दौरान खोदे गए माइनर मिनरल्स को उसी प्रोजेक्ट साइट पर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, तो डेवलपर्स से कोई रॉयल्टी नहीं ली जाएगी। इस कदम से प्रोजेक्ट की कुल लागत में कमी आने की उम्मीद है और डेवलपर्स पर फाइनेंशियल दबाव कम होगा।
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बीड जिले में सकलेश्वर मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान मिले दो प्राचीन मंदिरों के आधार

बीड जिले में सकलेश्वर मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान मिले दो प्राचीन मंदिरों के आधार बीड जिले के अंबाजोगाई के पास सकलेश्वर मंदिर परिसर में चल रही खुदाई के दौरान दो मंदिर के आधार मिलने की पुष्टि हुई है। पुरातत्व विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।  मामले के जानकारी देते हुए अधिकारी ने बताया कि सकलेश्वर मंदिर का निर्माण तकरीबन 1228 ईस्वी में यादव राजवंश द्वारा किया गया गया, जो पहले मिले एक शिलालेख के मुताबिक देवगिरि किले से शासन करते थे। इसे बाराखंबी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
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मीठी नदी पुनर्जीवन परियोजना में बीएमसी ने चरण 3 सुरंग की खुदाई पूरी की

मीठी नदी पुनर्जीवन परियोजना में बीएमसी ने चरण 3 सुरंग की खुदाई पूरी की बीएमसी के मुताबिक, मुंबई सीवरेज प्रोजेक्ट के तहत 15 मीटर नीचे 6.70 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जा रही है। यह भारत की सबसे छोटी सुरंग है जिसकी चौड़ाई 2.60 व्यास और बाहरी चौड़ाई 3.20 मीटर है। सुरंग में पांच शाफ्ट हैं और सुरंग का निर्माण अर्थ प्रेशर बैलेंस टनल बोरिंग मशीन की मदद से सेगमेंटल लाइनिंग सिस्टम पर किया जा रहा है।
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