मुंबई: टैक्सीमेंस कॉलोनी पुनर्विकास विवाद में पूर्व पदाधिकारियों पर FIR, फर्जी हस्ताक्षर कराने का आरोप
Mumbai: FIR against former office-bearers in Taximen's Colony redevelopment dispute, accused of forging signatures
मुंबई के कुर्ला स्थित टैक्सीमेंस कॉलोनी पुनर्विकास परियोजना को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। सोसायटी के पूर्व पदाधिकारियों पर कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए रीडेवलपमेंट प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का आरोप लगा है। मामले में FIR दर्ज कर पुलिस जांच शुरू कर दी गई है। आखिर क्या हैं आरोप और इस विवाद का सोसायटी के सदस्यों पर क्या असर पड़ सकता है, जानिए पूरी खबर।
मुंबई के कुर्ला इलाके में स्थित प्रसिद्ध टैक्सीमेंस को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी एक बार फिर विवादों में घिर गई है। सोसायटी के कुछ पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ कथित तौर पर सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर करने और पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी करने के आरोप में FIR दर्ज की गई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोसायटी के पुनर्विकास प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के लिए कुछ सदस्यों की सहमति दिखाने वाले दस्तावेज तैयार किए गए, जिनमें कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
टैक्सी चालकों के लिए बनाई गई यह आवासीय सोसायटी लंबे समय से पुनर्विकास को लेकर चर्चा में रही है। हाल के महीनों में डेवलपर के चयन और प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी कई सवाल उठे थे। सोसायटी के कुछ सदस्यों ने पहले भी आरोप लगाया था कि पुनर्विकास से जुड़े फैसलों में सभी हितधारकों की राय को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए किसी प्रस्ताव को आगे बढ़ाया गया है, तो यह न केवल सोसायटी के नियमों का उल्लंघन है बल्कि सदस्यों के अधिकारों पर भी असर डालता है। वहीं, आरोपों का सामना कर रहे पक्ष की ओर से अभी तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान दस्तावेजी साक्ष्य, हस्ताक्षरों की जांच और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
इस बीच, सोसायटी के कई सदस्य मामले की निष्पक्ष जांच और पुनर्विकास प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में पुनर्विकास परियोजनाओं की कार्यप्रणाली को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है।


