मुंबई : सामाजिक सुरक्षा के दायरे में जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट के डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवर ; सरकारी कर्मचारी जैसी सुविधाओं का लाभ
Mumbai: Delivery boys and cab drivers from Zomato, Swiggy, Blinkit come under social security cover; enjoy benefits similar to those of government employees
भारत में तेजी से बढ़ती ‘गिग इकोनॉमी’ को अब कानूनी सुरक्षा के दायरे में लाने की तैयारी पूरी हो चुकी है. नए सोशल सिक्योरिटी कोड में जोमैटो, स्विगी, और ब्लिंकिट के डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवर आदि को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है. इसके लिए सरकार ने ड्रॉफ्ट नियम जारी कर दिए हैं. इन ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा का लाभ पाने के लिए किसी एक ही कंपनी (एग्रीगेटर) से जुड़े वर्कर को एक साल में कम से कम 90 दिन उसी कंपनी के साथ काम करना अनिवार्य होगा. वहीं, जो लोग एक से ज्यादा प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हैं
मुंबई: भारत में तेजी से बढ़ती ‘गिग इकोनॉमी’ को अब कानूनी सुरक्षा के दायरे में लाने की तैयारी पूरी हो चुकी है. नए सोशल सिक्योरिटी कोड में जोमैटो, स्विगी, और ब्लिंकिट के डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवर आदि को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है. इसके लिए सरकार ने ड्रॉफ्ट नियम जारी कर दिए हैं. इन ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा का लाभ पाने के लिए किसी एक ही कंपनी (एग्रीगेटर) से जुड़े वर्कर को एक साल में कम से कम 90 दिन उसी कंपनी के साथ काम करना अनिवार्य होगा. वहीं, जो लोग एक से ज्यादा प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हैं, उनके लिए यह सीमा 120 दिन तय की गई है. अगर कोई व्यक्ति एक ही दिन में तीन अलग-अलग कंपनियों के लिए काम करते हैं, तो उसे तीन दिन गिना जाएगा, जिससे 120 दिन का कोटा पूरा करना आसान हो जाएगा.
नए साल के मौके पर गिग वर्कर्स की हड़ताल के चलते जहां स्विगी और जोमैटो ने पीक ऑवर्स और साल के आखिरी दिनों में इंसेंटिव देने का ऐलान किया है। वहीं, सरकार से भी उनके लिए अच्छी खबर आई है। सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी कवर देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस संबंध में नियमों का एक ड्राफ्ट जारी किया गया है।
कौन होगा पात्र?
सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए नए नियमों का एक ड्राफ्ट जारी करके उस पर सार्वजनिक सुझाव मांगे हैं। इस ड्राफ्ट में कहा गया है कि अगर कोई गिग वर्कर किसी एक कंपनी या ऐप के साथ एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिन काम करता है, तो वह सोशल सिक्योरिटी का लाभ उठाने का पात्र होगा। जबकि एक से ज्यादा एग्रीगेटर्स के साथ जुड़े वर्कर्स के लिए यह अवधि 120 दिन होगी।
कंपनियों की होगी रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी
कंपनियों (एग्रीगेटर्स) की यह जिम्मेदारी होगी कि वे अपने साथ काम करने वाले हर छोटे-बड़े वर्कर का विवरण सरकारी पोर्टल पर अपडेट करें. इसमें वे वर्कर्स भी शामिल होंगे जो किसी थर्ड-पार्टी एजेंसी या सहयोगी कंपनी के जरिए काम पर लगे हैं. क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी? नए नियमों का उद्देश्य गिग वर्कर्स को वह सुरक्षा देना है जो अब तक केवल सरकारी या बड़ी निजी कंपनियों के कर्मचारियों को मिलती थी. इसके तहत निम्नलिखित लाभ प्रस्तावित हैं:
स्वास्थ्य और जीवन बीमा: वर्कर्स को मुफ्त या रियायती दरों पर स्वास्थ्य बीमा मिलेगा. दुर्घटना कवर: काम के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा की व्यवस्था होगी. आयुष्मान भारत: श्रम मंत्रालय ने इन वर्कर्स को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे उन्हें 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल सकेगा. पेंशन की सुविधा: भविष्य में सरकार ऐसी योजना ला सकती है जिसमें वर्कर और कंपनी दोनों मिलकर योगदान देंगे, ताकि रिटायरमेंट के बाद वर्कर को पेंशन मिल सके.


