मुंबई : वायु प्रदूषण के नियम तोड़ने पर बुलेट ट्रेन के बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट पर एक बार फिर मनपा का ब्रेक; काम रोकने का नोटिस जारी
Mumbai: BMC once again puts the brakes on the much-anticipated bullet train project for violating air pollution regulations; stop-work notice issued
मुंबई-अमदाबाद बुलेट ट्रेन के बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट पर एक बार फिर मनपा का ब्रेक लग गया है। बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स के स्टेशन के निर्माण में वायु प्रदूषण के नियम तोड़ने पर महानगरपालिका ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत काम रोकने का नोटिस जारी किया है, जिससे एक बार फिर मुंबई-अमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के कार्य पर ब्रेक लग गया है।
मुंबई : मुंबई-अमदाबाद बुलेट ट्रेन के बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट पर एक बार फिर मनपा का ब्रेक लग गया है। बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स के स्टेशन के निर्माण में वायु प्रदूषण के नियम तोड़ने पर महानगरपालिका ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत काम रोकने का नोटिस जारी किया है, जिससे एक बार फिर मुंबई-अमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के कार्य पर ब्रेक लग गया है।
शहर में लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण से जहां लोग परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर मुंबई-अमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने मुंबई के वातारवण को और भी दूषित कर दिया है। इस वजह से मुंबईकरों में अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंता और प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी गई। हालांकि, मनपा द्वारा निर्माण कार्य के दौरान नियमों का उल्लंघन करनेवालों पर जुर्माना लगाए जाने के बावजूद शहर में धड़ल्ले से कंस्ट्रक्शन का कार्य चल रहा है। खैर, मुंबई-अमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के कार्य को तेजी से पूरा करने की कोशिश की जा रही है। वहीं दूसरी ओर बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स में चल रहे निर्माण कार्य में नियमों का उल्लंघन करने के कारण मनपा ने बुलेट ट्रेन के निर्माण कार्य पर नोटिस जारी कर रोक लगा दी है। परिणामस्वरूप, बुलेट ट्रेन का निर्माण कार्य रुक गया और परियोजना में आवश्यक सुधार होने तक यह कार्य रुका रहेगा।
स्थानीय लोगों ने किया विरोध
दरअसल, मुंबई-अमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट-ट्रेन) परियोजना के महाराष्ट्र खंड में पिछले कुछ महीनों में जमीन-अधिग्रहण, सुरंग-निर्माण तथा विस्फोटक कार्यों का ग्रामीण और किसान सक्रिय विरोध कर रहे थे। अक्टूबर २०२५ में पालघर जिले के जलसार, तेंबी व आसपास के गांवों में ग्रामीणों ने रात में बैरिकेड लगाकर निर्माण कार्य को अस्थायी रूप से रोक दिया था। विरोध का केंद्र बिंदु भूमि अधिग्रहण और सुरंग-विस्फोट के चलते घरों और खेती को हुआ संभावित नुकसान बताया गया। मार्च २०२५ से शुरू हुए सुरंग-निर्माण और ब्लास्टिंग से स्थानीय लोग पहले ही असंतुष्ट थे। उनका कहना था कि ब्लास्ट की तीव्रता से घरों में दरारें पड़ने से लोगों में भय बढ़ गया। निवासियों का कहना था कि विस्फोट का असर दूर तक महसूस हुआ। प्रभावितों का कहना है कि मुआवजे की सूची, दरें और भुगतान प्रक्रिया के बारे में साफ-साफ नहीं बताया गया कि किसे, कितनी जमीन के लिए कितना पैसा मिलेगा। मुआवजा उनकी मुख्य मांग रही।


