प्रकाश अंबेडकर और उद्धव की मुलाकात से यह कैसी हलचल? नए राजनीतिक समीकरण के संकेत

प्रकाश अंबेडकर और उद्धव की मुलाकात से यह कैसी हलचल? नए राजनीतिक समीकरण के संकेत

मुंबई. भाजपा से अलग होने के बाद कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने वाली शिवसेना क्या राज्य में नए राजनीतिक समीकरण बना सकती है। मंगलवार को मुख्यमंत्री उद्धव और बाबा साहब अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर की मुलाकात को राजनीतिक विशेषज्ञ इसी नजरीए से देख रहे हैं।दरअसल मंगलवार को वंचित बहुजन आघाडी के अध्यक्ष प्रकाश अंबेडकर ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से उनके निवास स्थान मातोश्री पर जाकर मुलाकात की। दोनों के बीच लगभग आधे घंटे तक बातचीत हुई। मुख्यत: दो विषयों पर चर्चा होने की खबर मिली है। इसमें पहला आगामी एक जनवरी को पुणे के भीमा-कोरेगांव में होने वाले मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उद्धव ठाकरे से प्रकाश आंबेडकर ने चर्चा की। भीमा-कोरेगांव में पिछले वर्ष विवाद हो जाने की वजह से पिछड़े समाज के लोगों में भय व्याप्त है। जिसे देखते हुए प्रकाश अंबेडकर ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर भीमा कोरेगांव की सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने की मांग की। आगामी दिनों में किसी प्रकार की अनहोनी ना हो इसके लिए कोरेगांव विवाद से जुड़े लोगों को हिरासत में लेने की मांग की गई।

इस गांव में पिछले दो सौ वर्षों से मेले का आयोजन किया जाता है। बताया जाता है कि ब्राह्मणों और पिछड़े समाज के बीच हुए संघर्ष में जीत पिछड़े समाज की हुई थी, तब से इस मेले का आयोजन किया जा रहा है। भीमा-कोरेगांव में पिछले वर्ष कुछ असामाजिक तत्वों ने पथराव कर दिया था, जिसके बाद जम कर हिंसा भड़की थी। इस के बाद राज्य भर में फैली आग में कई लोगों की जानें गईं थीं। पुलिस ने भी इस मामले में भिड़े गुरुजी, एकबोटे सहित कई लोगों को खिलाफ संज्ञान लेकर जांच कर रही है।एनआरसी पर साथ मांगाइसके अलावा प्रकाश अंबेडकर वाली वंचित बहुजन आघाड़ी की ओर से 26 दिसंबर को एनआसी के विरोध में मोर्चे का आयोजन किया जाएगा। इस मोर्चे में प्रकाश अंबेडकर ने मुख्यमंत्री उद्धव को आमंत्रित किया है। बताया जा रहा है कि इस आमंत्रण में राज्य में नए राजनीतिक समीकरण बुनने की कोशिश छिपी है।

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कांग्रेस और एनसीपी के बूते सरकार बना चुके उद्धव के लिए आगामी कोई भी चुनाव आसान नहीं होगा। अपने वजूद बनाए रखने के लिए उसे किसी ना किसी मजबूत वोटबैंक की जरूरत पडऩेवाली है। अपने साथियों को स्थाई नहीं समझते हुए उद्धव नए साथी को अभी से तैयार करने की कोशिश के तहत मोर्चे में शामिल हो सकते हैं।सरकार में आने की वजह से यह तय है कि शिवसेना आगामी दिनों में भाजपा के वोट बैंक पर ही निशाना साधेगी, बाकी जो कमी पूरी करनी होगी वह प्रकाश अंबेडकर की पार्टी के साथ मिलकर किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि उद्धव को मोर्चे में शामिल करने के लिए आमंत्रित करना इसी रणनीति का अंग बताया जा रहा है। वंचित बहुजन आघाड़ी की ओर से 26 दिसंबर को दादर टीटी से दिन के 12 बजे मोर्चा निकाला जाएगा, जिसमें राज्यभर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित होकर विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे।

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