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मुंबई : दिशा सालियान केस में बॉम्बे हाई कोर्ट की मुंबई पुलिस को फटकार, कहा- नो एक्सक्यूज, जांच में देरी क्यों?

मुंबई : दिशा सालियान केस में बॉम्बे हाई कोर्ट की मुंबई पुलिस को फटकार, कहा- नो एक्सक्यूज, जांच में देरी क्यों? पूर्व सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में पुलिस जांच में देरी पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा, आखिर पुलिस की जांच में समय क्यों लग रहा है। जून 2020 में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर सालियान की मालाड स्थिति एक बिल्डिंग की 14वीं मंजिल से गिरने से मौत हो गई थी। केस के संबंध में पुलिस ने दुर्घटनावश मैत का मामला दर्ज किया था। कोर्ट में सालियान के पिता सतीश की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई चल रही है। 
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मुंबई : अवैध पार्किंग को लेकर याचिकाकर्ताओं को हाई कोर्ट की फटकार 

मुंबई : अवैध पार्किंग को लेकर याचिकाकर्ताओं को हाई कोर्ट की फटकार  मुंबई हाई कोर्ट ने विक्रोली स्टेशन पर अवैध पार्किंग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाई है। हाई कोर्ट ने कहा कि आप भी लोगों में अवैध पार्किंग के बारे में जागरूकता पैदा कर सकते हैं।
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हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को लगाई फटकार, शहीद मेजर की विधवा को नहीं मिले पूर्व सैनिक नीति के तहत फायदे...

हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को लगाई फटकार, शहीद मेजर की विधवा को नहीं मिले पूर्व सैनिक नीति के तहत फायदे... पीठ ने कहा कि 'क्योंकि ये विशेष मामला है, इसलिए हमने राज्य की सर्वोच्च अथॉरिटी (मुख्यमंत्री) को भी इस मामले पर प्राथमिकता से विचार करने और उचित फैसला लेने को कहा था। उन्हें इस पर फैसला लेना चाहिए था। अगर उन्होंने फैसला नहीं किया है तो हमें बताएं फिर हम इस मामले को देखेंगे कि क्या करना है।' हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 17 अप्रैल तक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि 'इसके बाद वे मामले से अपने हिसाब से निपटेंगे।' 
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नाबालिगों की पिटाई के लिए पुलिस को राज्य बाल अधिकार आयोग ने लगाई फटकार...

नाबालिगों की पिटाई के लिए पुलिस को राज्य बाल अधिकार आयोग ने लगाई फटकार... राज्य बाल अधिकार आयोग (एमएससीपीआर) चार लड़कियों और एक लड़के सहित पांच बच्चों के मामले की सुनवाई कर रहा था, जिन्हें चोरी के संदेह में हिरासत में लिया गया था और शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन के अंदर मौखिक और शारीरिक शोषण किया गया था। आयोग ने इस मामले में पुलिस की खिंचाई की और बाल अधिकारों को समझने और उनका पालन करने की हिदायत दी. आयोग ने पुलिस को सात दिनों के भीतर जांच पूरी करने और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया.
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