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Read More... मुंबई: कैडिला केस में एफडीए को झटका हाई कोर्ट ने लगाई फटकार
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By Online Desk
बॉम्बे हाई कोर्ट ने दवा कंपनी कैडिला फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के खिलाफ महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने बिक्री रोकने और दवाओं का स्टॉक जब्त करने जैसे कदमों को लेकर नियामक एजेंसी के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि कानून में पहले कार्रवाई करना और बाद में सवाल पूछना स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद महाराष्ट्र एफडीए ने कैडिला के खिलाफ जारी मौजूदा स्टॉप-सेल आदेश वापस लेने पर सहमति जताई है। एजेंसी ने अदालत को भरोसा दिलाया कि भविष्य में किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई से पहले उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आर.वी. घुगे और जस्टिस गौतम अंखाद की पीठ कैडिला फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कंपनी ने महाराष्ट्र एफडीए के उन निर्देशों को चुनौती दी थी, जिनके तहत उसकी कुछ दवाओं की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने के साथ करीब 2.45 करोड़ रुपये का स्टॉक जब्त किया गया था। कंपनी की ओर से अदालत में कहा गया कि एफडीए ने कार्रवाई करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया। मामला कैडिला की कुछ दवाओं के नाम और ब्रांडिंग में कथित समानता से जुड़ा है। एफडीए ने एसीलोक 150, एसीलोक 150 प्लस, एसीलोक 300 और एसीलोक 300 प्लस जैसी दवाओं को लेकर कार्रवाई की थी। नियामक एजेंसी का तर्क था कि इन दवाओं की ब्रांडिंग में समानता के कारण मरीजों और ग्राहकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी आधार पर राज्यभर में कुछ दवाओं की बिक्री और वितरण पर रोक लगाई गई थी तथा कंपनी के लगभग 2.45 करोड़ रुपये के स्टॉक को जब्त किया गया था। मुंबई: 'सरकारी एजेंसी को भेदभावपूर्ण कार्रवाई का अधिकार नहीं', बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र एफडीए को लगाई फटकार
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बांबे हाईकोर्ट ने भेदभावपूर्ण और चुनिंदा कार्रवाई के लिए महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की खिंचाई की है। कहा है कि एफडीए एक ओर राज्य सरकार के मंत्रालयों की कैंटीनों की खाद्य सामग्री और वहां की स्वच्छता में खामियां मिलने पर उन्हें मात्र व्यवस्था में सुधार का नोटिस देता है, वहीं दूसरी ओर वह प्राइवेट होटलों में मामूली खामियां मिलने पर लाइसेंस रद जैसी कार्रवाई करता है। मुंबई: 'गड्ढामुक्त सड़कें बनाने के लिए क्या 20 साल और चाहिए', बॉम्बे हाई कोर्ट की बृहन्मुंबई नगर निगम को कड़ी फटकार
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मुंबई में सड़कों की खराब स्थिति वहां रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ा चिंता का विषय है। ऐसे में बीते सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई की सड़कों की खस्ता हालत और रोड सेफ्टी को लेकर बृहन्मुंबई नगर निगम के ढीले रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने बीएमसी से सीधे शब्दों में पूछा कि आखिर मुंबई की सभी सड़कों को चलने लायक बनाने के लिए नागरिक निकाय को और कितने साल लगेंगे? मुंबई : दिशा सालियान केस में बॉम्बे हाई कोर्ट की मुंबई पुलिस को फटकार, कहा- नो एक्सक्यूज, जांच में देरी क्यों?
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पूर्व सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में पुलिस जांच में देरी पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा, आखिर पुलिस की जांच में समय क्यों लग रहा है। जून 2020 में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर सालियान की मालाड स्थिति एक बिल्डिंग की 14वीं मंजिल से गिरने से मौत हो गई थी। केस के संबंध में पुलिस ने दुर्घटनावश मैत का मामला दर्ज किया था। कोर्ट में सालियान के पिता सतीश की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई चल रही है। 
