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मुंबई :  जहरीली हवा पर हाईकोर्ट सख्त, निगरानी के लिए बनेगी हाई-पावर कमेटी; रोज होगी समीक्षा

मुंबई :  जहरीली हवा पर हाईकोर्ट सख्त, निगरानी के लिए बनेगी हाई-पावर कमेटी; रोज होगी समीक्षा बढ़ते वायु प्रदूषण पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने निगरानी के लिए एक हाई-पावर कमेटी गठित करने का निर्णय लिया, जो रोज़ाना समीक्षा करेगी। कोर्ट ने कहा कि अब तक के कदम नाकाफी रहे और दिसंबर में हालात बहुत गंभीर थे। मुंबई और आसपास के इलाकों में बढ़ते वायु प्रदूषण पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए एक उच्चस्तरीय (हाई-पावर) समिति गठित करने का फैसला किया है।
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मुंबई : ए आई-इनेबल्ड एयर-क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू करने की तैयारी

मुंबई : ए आई-इनेबल्ड एयर-क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू करने की तैयारी बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक इंडिपेंडेंट, ए आई-इनेबल्ड एयर-क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू करने की तैयारी कर रहा है। यह सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मौजूदा नेटवर्क के साथ-साथ काम करेगा और पहली बार आस-पड़ोस के लेवल का डेटा देगा। अधिकारियों ने कहा कि यह सिस्टम छह महीने में लागू हो जाएगा।
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ठाणे : ढाई महीने में 30 हजार से ज्यादा वाहन चालक नियम तोड़ते पकड़े गए; तीसरी आंख' की निगरानी 

ठाणे : ढाई महीने में 30 हजार से ज्यादा वाहन चालक नियम तोड़ते पकड़े गए; तीसरी आंख' की निगरानी  ठाणे पुलिस द्वारा कडबरी सिग्नल पर सितंबर महीने से शुरू की गई एआई आधारित आईटीएमएस प्रणाली ने सिर्फ ढाई महीने में ही 30,085 वाहन चालकों को ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते पकड़ा है। इन सभी चालकों को नियमभंग के अनुसार ई-चलान जारी कर दिया गया है। 24 घंटे सक्रिय रहने वाले हाई-डेफिनेशन कैमरे सिग्नल पर हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहे हैं।
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मुंबई : त्यौहारी सीजन में मिलावट खोरों के खिलाफ मुहिम; मिठाई की दुकानों, क्लाउड किचन, होटलों, दूध में मिलावट जैसी हर चीज की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण 

मुंबई : त्यौहारी सीजन में मिलावट खोरों के खिलाफ मुहिम; मिठाई की दुकानों, क्लाउड किचन, होटलों, दूध में मिलावट जैसी हर चीज की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण  महाराष्ट्र के खाद्य व औषधि प्रशासन (एफडीए) ने त्यौहारी सीजन में मिलावट खोरों के खिलाफ मुहिम छेड़ रखी है। लेकिन एफडीए अधिकारियों के कमी के कारण मिलावट पर अंकुश लगाने में प्रशासन असहज महशूस कर रहा है। एफडीए आयुक्त राजेश नार्वेकर का खुद मानना है कि राज्य में 1100 अधिकारियों की जरूरत है, जबकि फील्ड पर 130 ही कार्यरत हैं और 194 प्रशिक्षण ले रहे हैं। नार्वेकर के अनुसार एफडीए पिछले कुछ वर्षों से रेहड़ी-पटरी वालों और महिला बचत गुटों समूहों को प्रशिक्षण दे रहा है। 
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