मुंबई : नो गैस, नो डब्बा! एलपीजी संकट से मुंबई का टिफिन नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित
Mumbai: No gas, no dabba! LPG crisis severely impacts Mumbai's tiffin network
पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग की वजह से देश में एलपीजी की सप्लाई पर असर पड़ा है. ईरान ने प्रमुख तेल-गैस ढुलाई मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की बात कही है. इससे तेल-गैस की ढुलाई पर असर पड़ा है. भारत भी अपनी गैस जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं अरब देशों से आयात करता है. ऐसे में भारत में भी एलपीजी की कमी देखी जा रही है. हालांकि सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं पर असर न पड़े, इसके लिए कई जरूरी कदम उठा रही है. एलपीजी के कमर्शिलय सिलेंडरों में कमी की गई है. इस कारण तमाम रेस्टोरेंटों और टिफिन सर्विस देने वाले लोगों के काम पर असर पड़ा है. इसी में से एक है मु्ंबई का फेमस टिफिन नेटवर्क.
मुंबई : पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग की वजह से देश में एलपीजी की सप्लाई पर असर पड़ा है. ईरान ने प्रमुख तेल-गैस ढुलाई मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की बात कही है. इससे तेल-गैस की ढुलाई पर असर पड़ा है. भारत भी अपनी गैस जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं अरब देशों से आयात करता है. ऐसे में भारत में भी एलपीजी की कमी देखी जा रही है. हालांकि सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं पर असर न पड़े, इसके लिए कई जरूरी कदम उठा रही है. एलपीजी के कमर्शिलय सिलेंडरों में कमी की गई है. इस कारण तमाम रेस्टोरेंटों और टिफिन सर्विस देने वाले लोगों के काम पर असर पड़ा है. इसी में से एक है मु्ंबई का फेमस टिफिन नेटवर्क.
मुंबई के साकिनाका से वर्ली तक, मुंबई का पारंपरिक टिफिन सर्विस नेटवर्क अब गंभीर एलपीजी संकट की चपेट में है. यह टिफिन सर्विस ऐप आधारित डिलिवरी सर्विस से दशकों पहले से मुंबई नगरी में घर-घर खाना पहुंचाने का एक बड़ा नेटवर्क है. एलपीजी सिलेंडर की कमी के कारण कई टिफिन वाले पुराने जमाने की लकड़ी-कोयले की सिगड़ी पर खाना बना रहे हैं, मेन्यू काट रहे हैं और ऑर्डर ठुकरा रहे हैं. कुछ तो पूरी तरह बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक साकिनाका में 33 वर्षीय चिराग पुरोहित 2009 से ‘यम्मी टिफिन्स’ चला रहे हैं. एलपीजी न मिलने पर उन्होंने लकड़ी और कोयले की सिगड़ी पर खाना बनाना शुरू कर दिया है. वह बताते हैं कि रोटी-सब्जी के अलावा हम हाई-प्रोटीन राइस बाउल भी बनाते थे, लेकिन अब उन्हें बंद करना पड़ा है. एक दिन में 500 डब्बे बनते थे, अब घटकर 300 रह गए हैं. सिगड़ी पर खाना बनने में बहुत ज्यादा समय लगता है. उनकी कैटरिंग बिजनेस भी बुरी तरह प्रभावित हुई है.
इसी तरह भांडुप में 29 वर्षीय ओमकार अजित पाटकर ‘भोजनयान टिफिन सर्विस’ चला रहे हैं. वह कहते हैं कि चाइनीज डिश या फ्राई करने वाली चीजें लकड़ी-कोयले पर नहीं बनाई जा सकतीं. पिछले दो हफ्तों से एक भी सिलेंडर नहीं मिला है. हम बंद होने के कगार पर हैं. जोशेवाड़ी में लक्ष्मी टिफिन सर्विस भी बंद हो गई. 30 वर्षीय आकाश अधिवंद रोजाना 70 डब्बे छात्रों, कामकाजी लोगों और परिवारों को सप्लाई करते थे. उन्होंने कहा कि दूसरा सिलेंडर खत्म हो गया, रिफिल नहीं हो पाया. गैस एजेंसी सिर्फ इतना कह रही है कि कुछ दिनों में स्थिति सुधर सकती है.
वर्ली कोलीवाड़ा में नीतीन मोरगांवकर ‘आईचा डब्बा टिफिन सर्विस’ चलाते हैं. वह कहते हैं कि 14 किलो वाले सिलेंडर का दाम 920 रुपये से बढ़कर ब्लैक में 2,500-3,000 रुपये हो गया है. पहले 120 रुपये में मिलने वाला साधारण रोटी-सब्जी का डब्बा अब 135 रुपये का हो गया है. डिलीवरी के साथ 175 रुपये. मार्जिन करीब 30 प्रतिशत घट गया है. उनकी पांच महिलाएं रोज 2,000 चपातियां बनाकर थोक में बेचती थीं, लेकिन अब वह काम भी बंद करना पड़ा. मोरगांवकर कहते हैं कि इन महिलाओं का रोजगार छिन गया, लेकिन मेरे पास कोई विकल्प नहीं था.
केंद्र ने बढ़ाई कोटा, लेकिन टिफिन वालों को अभी राहत नहीं
केंद्र सरकार ने सोमवार से सभी राज्यों में कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई 20 प्रतिशत बढ़ा दी है, जिससे कुल आवंटन पूर्व संकट स्तर का 50 प्रतिशत हो गया है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने 21 मार्च को जारी पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया कि अतिरिक्त 20 प्रतिशत कोटा रेस्तरां, ढाबा, होटल, इंडस्ट्रियल कैंटीन, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी यूनिट, सब्सिडाइज्ड कैंटीन और 5 किलो फ्री ट्रेड सिलेंडर (माइग्रेंट मजदूरों के लिए) को प्राथमिकता से दिया जाए.


