मुंबई : चुनाव में जीतने वालों के पाला बदलने के बाद राजनीतिक गठबंधनों को लेकर ठाणे जिला कलेक्टर के आदेशों पर रोक 

Mumbai: Thane District Collector's orders on political alliances stayed after election winners switched sides

मुंबई : चुनाव में जीतने वालों के पाला बदलने के बाद राजनीतिक गठबंधनों को लेकर ठाणे जिला कलेक्टर के आदेशों पर रोक 

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में जीतने वालों के पाला बदलने के बाद राजनीतिक गठबंधनों को लेकर ठाणे जिला कलेक्टर के आदेशों पर रोक लगा दिया है। अदालत ने चार एनसीपी (अजीत पवार गुट) उम्मीदवारों के दो बार पाला बदलने पर टिप्पणी की। वे पहले बीजेपी-कांग्रेस के ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी(एवीए)’ में शामिल हुए थे और बाद में शिवसेना में शामिल हो गए।

मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट ने अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में जीतने वालों के पाला बदलने के बाद राजनीतिक गठबंधनों को लेकर ठाणे जिला कलेक्टर के आदेशों पर रोक लगा दिया है। अदालत ने चार एनसीपी (अजीत पवार गुट) उम्मीदवारों के दो बार पाला बदलने पर टिप्पणी की। वे पहले बीजेपी-कांग्रेस के ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी(एवीए)’ में शामिल हुए थे और बाद में शिवसेना में शामिल हो गए। न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री की पीठ के समक्ष अंबरनाथ विकास अघाड़ी(एवीए) की याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में कलेक्टर के 9 जनवरी के आदेश को चुनौती दी गई। पीठ ने कलेक्टर को इस मामले में संबंधित पार्टियों बीजेपी, कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना को सुनवाई का मौका देने और उसके बाद आदेश देने का निर्देश दिया है।

 

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सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी किया कि आज ये चार लोग (एनसीपी सदस्य) उनके (एकनाथ शिंदे) साथ हैं, कल वे किसी और के साथ थे। वे इधर-उधर घूम रहे हैं। क्या होगा अगर कल वे किसी और के साथ चले जाएं? पीठ ने सभी संबंधित पक्षों को 28 जनवरी को कलेक्टर को अपनी लिखित दलील देने का निर्देश दिया और उन्हें उसके 21 दिन बाद आदेश पारित करना होगा। पीठ ने कहा कि कलेक्टर का आदेश पारित होने के दो हफ्ते बाद तक लागू नहीं किया जाएगा, जिससे पीड़ित पक्ष कोर्ट का रुख कर सकें। पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कलेक्टर के 7 और 9 जनवरी के आदेशों पर रोक लगा दिया है। 

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20 दिसंबर को नगर परिषद चुनावों के बाद बीजेपी की स्थानीय इकाई ने नगर परिषद में सत्ता हासिल करने के लिए अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के साथ एवीए के बैनर तले हाथ मिला लिया, जिससे उसकी सहयोगी शिवसेना को सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सत्ता से दूर रहना पड़ा। एवीए में अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी भी शामिल थी, जो राज्य सरकार में बीजेपी की एक और सहयोगी है। बीजेपी ने सीधे चुनाव से नगर परिषद अध्यक्ष का पद जीता, जबकि शिवसेना ने 60 में से 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। बीजेपी के 14, कांग्रेस के 12, एनसीपी के 4 और 2 निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो सीटें जीतीं हैं।

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ठाणे जिला कलेक्टर ने 7 जनवरी को एवीए को ‘चुनाव पूर्व गठबंधन' के रूप में मान्यता दी। गठबंधन को लेकर हंगामे के बाद कांग्रेस ने अपने सभी 12 निर्वाचित सदस्यों को निलंबित कर दिया, तो वे बीजेपी में शामिल हो गए। इसके बाद चार एनसीपी सदस्य शिवसेना के समर्थन में चले गए और कलेक्टर ने 9 जनवरी को उनके गठबंधन को भी "चुनाव पूर्व गठबंधन" के रूप में मान्यता दी, जबकि एवीए की मान्यता रद्द कर दी, जिसके बाद एवीए ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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