मुंबई : कौन होगा नया मेयर? भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद 5 चेहरों पर चर्चा, अब फडणवीस पूरा करेंगे चुनावी वादा
Mumbai: Who will be the new mayor? Five candidates are being discussed after the BJP's victory, and now Fadnavis will fulfill his election promise.
बीएमसी चुनाव के नतीजों ने मुंबई की राजनीति की पूरी तस्वीर बदल दी है. भारतीय जनता पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) ने इस महाजंग में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर देश की सबसे अमीर महानगर पालिका पर अपना परचम लहरा दिया है. इस बड़ी जीत के साथ ही अब सबकी नजरें इस सवाल पर टिकी हैं कि मुंबई का अगला मेयर कौन होगा?
मुंबई : बीएमसी चुनाव के नतीजों ने मुंबई की राजनीति की पूरी तस्वीर बदल दी है. भारतीय जनता पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) ने इस महाजंग में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर देश की सबसे अमीर महानगर पालिका पर अपना परचम लहरा दिया है. इस बड़ी जीत के साथ ही अब सबकी नजरें इस सवाल पर टिकी हैं कि मुंबई का अगला मेयर कौन होगा? चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बेहद प्रभावशाली और रणनीतिक बयान दिया था कि “मुंबई का अगला मेयर हिंदू और मराठी होगा.” अब जब नतीजे बीजेपी के पक्ष में आए हैं, तो फडणवीस का यह वादा केवल एक राजनीतिक बयान नहीं बल्कि बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती और अवसर बन गया है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि स्थानीय पहचान और क्षेत्रीय गौरव को बढ़ावा देना कोई संकीर्ण राजनीति नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार है.
बीएमसी चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के “मेयर हिंदू और मराठी होगा” वाले बयान के बाद, पार्टी के भीतर उन चेहरों की चर्चा तेज हो गई है जो इस कसौटी पर खरे उतरते हैं.
बीएमसी मेयर पद के लिए इन 5 नामों पर चर्चा
1. तेजस्वी घोसालकर : दहिसर (वार्ड नंबर 2) से 10,000 से अधिक वोटों से जीत दर्ज करने वाली तेजस्वी इस समय बीजेपी की सबसे बड़ी ‘पोस्टर गर्ल’ हैं. उन्होंने उद्धव गुट के गढ़ में सेंध लगाई है. वह युवा हैं, शिक्षित हैं और मुख्यमंत्री के ‘मराठी-हिंदू’ फॉर्मूले में पूरी तरह फिट बैठती हैं.
2. प्रकाश दरेकर : विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष प्रवीण दरेकर के भाई प्रकाश दरेकर ने वार्ड नंबर 3 से शानदार जीत हासिल की है. दरेकर परिवार का मुंबई और विशेषकर उत्तर-पश्चिम मुंबई के मराठी वोट बैंक पर जबरदस्त प्रभाव है. उनके पास प्रशासनिक अनुभव भी है, जो उन्हें मेयर पद का प्रबल दावेदार बनाता है.
3. प्रभाकर शिंदे : बीएमसी में बीजेपी के पूर्व गुट नेता प्रभाकर शिंदे पार्टी के सबसे अनुभवी पार्षदों में से एक हैं. उन्हें नगर निगम के कामकाज और नियमों की गहरी समझ है. ‘मराठी चेहरा’ होने के साथ-साथ अनुभवी होने के कारण वह मेयर की कुर्सी के लिए सुरक्षित विकल्प माने जा रहे हैं.
4. मकरंद नार्वेकर : विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के भाई मकरंद नार्वेकर दक्षिण मुंबई के एक रसूखदार नाम हैं. वह लगातार जीतते आ रहे हैं और कोलाबा क्षेत्र में उनकी पकड़ बहुत मजबूत है. हालांकि वह ‘मराठी’ वर्ग से आते हैं, लेकिन उनकी छवि एक आधुनिक और विकासवादी नेता की है, जिसे बीजेपी भुनाना चाहेगी.
5. राजश्री शिरवाडकर : वार्ड नंबर 172 से जीतने वाली राजश्री शिरवाडकर बीजेपी की एक निष्ठावान और आक्रामक मराठी महिला चेहरा हैं. अगर पार्टी किसी महिला को मेयर बनाने का फैसला करती है (आरक्षण के आधार पर), तो राजश्री का नाम सबसे ऊपर होगा. वह स्थानीय मुद्दों पर काफी सक्रिय रहती हैं.
बीएमसी चुनाव परिणाम और मेयर का पद
1. बीजेपी की ऐतिहासिक जीत
बीएमसी चुनाव 2026 में बीजेपी ने दशकों पुराने शिवसेना के दबदबे को किनारे करते हुए सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सबको चौंका दिया है. विकास के एजेंडे और हिंदुत्व के मेल ने बीजेपी को वह जादुई आंकड़ा छूने में मदद की है जिसकी तलाश उसे वर्षों से थी. इस जीत ने साफ कर दिया है कि मुंबई की जनता ने अब डबल इंजन सरकार पर भरोसा जताया है.
2. मुख्यमंत्री फडणवीस का ‘हिंदू-मराठी’ कार्ड
देवेंद्र फडणवीस ने मेयर के चयन को लेकर जो स्टैंड लिया है वह काफी चर्चा में है. उन्होंने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि चेन्नई, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे कॉस्मोपॉलिटन शहरों में अगर वहां की स्थानीय पहचान वाले मेयर हो सकते हैं तो मुंबई में क्यों नहीं? उनके मुताबिक मुंबई की जड़ों से जुड़ा मेयर होना शहर के सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने के लिए जरूरी है.
3. ‘मराठी-वाद’ नहीं, क्षेत्रीय गौरव की बात
मुख्यमंत्री ने यह तर्क दिया है कि मराठी अस्मिता की बात करना ‘मराठी-वाद’ नहीं है. उनका मानना है कि जिस तरह अन्य राज्यों में स्थानीय भाषा और पहचान को सम्मान दिया जाता है, महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में भी उसी संवैधानिक परंपरा का पालन होना चाहिए. यह बयान सीधे तौर पर उन मराठी मतदाताओं को साधने की कोशिश है जो पारंपरिक रूप से शिवसेना के साथ रहे हैं.


