बॉम्बे हाईकोर्ट से गैंगस्टर अबू सलेम को राहत नहीं; मामले पर बाद में सुनवाई
No relief to gangster Abu Salem from Bombay High Court; hearing on the case later

गैंगस्टर अबू सलेम को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि सलेम ने पुर्तगाल से प्रत्यर्पण की शर्तों के अनुसार, भारत की जेल में अभी तक 25 साल पूरे नहीं किए हैं। सलेम ने रिहाई के लिए याचिका दायर की थी। कोर्ट ने याचिका तो स्वीकार कर ली, लेकिन तुरंत कोई राहत देने से मना कर दिया। कोर्ट इस मामले पर बाद में सुनवाई करेगा।
मुंबई: गैंगस्टर अबू सलेम को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि सलेम ने पुर्तगाल से प्रत्यर्पण की शर्तों के अनुसार, भारत की जेल में अभी तक 25 साल पूरे नहीं किए हैं। सलेम ने रिहाई के लिए याचिका दायर की थी। कोर्ट ने याचिका तो स्वीकार कर ली, लेकिन तुरंत कोई राहत देने से मना कर दिया। कोर्ट इस मामले पर बाद में सुनवाई करेगा।
कोर्ट में दायर की थी याचिका
दरअसल अबू सलेम ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। वह जेल से रिहा होना चाहता था। उसने कहा कि अगर अच्छे व्यवहार के लिए छूट को जोड़ा जाए, तो वह 25 साल की सजा काट चुका है। सलेम ने अपनी याचिका में एक बात कही। उसने कहा कि जब उसे पुर्तगाल से भारत लाया गया, तब सरकार ने एक वादा किया था। वादा यह था कि उसे मौत की सजा नहीं दी जाएगी। साथ ही उसे 25 साल से ज्यादा जेल में नहीं रखा जाएगा।
कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस राजेश पाटिल की बेंच ने सलेम की याचिका पर सुनवाई की। उन्होंने याचिका तो ले ली, लेकिन उसे कोई अंतरिम राहत नहीं दी। इसका मतलब है कि उसे अभी जेल में ही रहना होगा। बेंच ने एक महत्वपूर्ण बात कही। कोर्ट ने सु्प्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सलेम को अक्टूबर 2005 में गिरफ्तार किया गया था। इसलिए पहली नजर में यह साफ है कि उसकी 25 साल की सजा अभी पूरी नहीं हुई है। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, सलेम की गिरफ्तारी अक्टूबर 2005 में हुई थी और इसलिए प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि 25 साल की अवधि अभी पूरी नहीं हुई है।
उचित समय पर सुनवाई
कोर्ट ने यह भी कहा कि वह इस याचिका पर अंतिम सुनवाई उचित समय पर करेगी। इसका मतलब है कि सलेम को अपनी रिहाई के लिए अभी और इंतजार करना होगा। कोर्ट इस मामले को पूरी तरह से समझने के बाद ही कोई फैसला लेगा।