केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्यकर्मियों पर हिंसा को संज्ञेय और गैर जमानती अपराध बनाए जाने के अध्यादेश को मंजूरी दी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोविड-19 महामारी से उत्पन्न स्थिति के मद्देनजर महामारी आपदा अधिनियम, 1897 में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने को मंजूरी दे दी है। अब स्वास्थ्य कर्मियों के साथ हिंसक कार्रवाई को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध बना दिया गया है। अध्यादेश में स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों को चोट पहुंचाने या उन्हें नुकसान पहुंचाने या संपत्ति को क्षतिग्रस्त करने पर क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने संवाददाताओं को बताया कि स्वास्थ्यकर्मी कोविड-19 महामारी से देश को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसलिए उनपर हमले दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हिंसा और उन्हें नुकसान पहुंचाने को सहन नहीं किया जाएगा। श्री जावड़ेकर ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले के मामले की जांच 30 दिन के अंदर पूरी की जाएगी और अधिकतम एक वर्ष के अंदर न्याय किया जाएगा।
श्री जावडे़कर ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले के दोषी को तीन से पांच महीने की कैद तथा पचास हजार से दो लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गंभीर क्षति पहुंचाने के मामले में दोषी को छह महीने से सात वर्ष की कैद हो सकती है। ऐसे दोषियों पर एक लाख से पांच लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। श्री जावड़ेकर ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों के वाहनों या क्लीनिक को नुकसान पहुंचाने वाले दोषियों से क्षतिग्रस्त सम्पत्ति के मूल्य का दोगुना जुर्माना वसूला जाएगा।
श्री जावड़ेकर ने कहा कि पिछले तीन महीनों में सरकार ने कोविड-19 महामारी के मद्देनज़र अनेक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने डॉक्टरों, नर्सों और आशा कार्यकर्ताओं सहित सभी स्वास्थ्यकर्मियों को 50 लाख रुपये का बीमा उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। कोविड-19 के संक्रमण के मामले में लाभार्थी का इलाज आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री ‘जन आरोग्य योजना’ के तहत निशुल्क किया जाएगा। अन्य बीमारियों के मामले में लाभार्थी ऐसे अस्पतालों में भी निशुल्क इलाज कराने का पात्र होगा, जो सरकारी सूची में शामिल नहीं है। ऐसे अस्पतालों में इलाज का खर्च सरकारी अस्पताल से जारी प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकार देगी।
श्री जावड़ेकर ने कहा कि देशभर में सात सौ 23 कोविड-19 अस्पताल बनाए गए हैं। इनमें लगभग दो लाख आइसोलेशन बिस्तर, 24 हजार आई सी यू बिस्तर और 12 हजार एक सौ 90 वेंटिलेटर हैं। व्यक्तिगत सुरक्षा किट–पीपीई और एन-95 मास्क की उपलब्धता के बारे में श्री जावड़ेकर ने कहा कि देश में 77 घरेलू कम्पनियां पीपीई बना रही हैं, जिन्हें एक करोड़ 88 लाख पीपीई का आदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस समय 25 लाख एन-95 मास्क उपलब्ध हैं तथा लगभग ढाई करोड़ मास्क का आर्डर दिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि महामारी संशोधन अध्यादेश 2020 कोविड-19 महामारी से लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभा रहे प्रत्येक स्वास्थ्य कार्यकर्ता की सुरक्षा की सरकार की प्रतिबद्धता को व्यक्त करता है। प्रधानमंत्री ने ट्वीटर पर कहा कि इससे हमारे स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।


