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मुंबई : दिल, दिमाग, आंत का रंग हरा, फूड पॉइजनिंग से मौतें नहीं, मुंबई तरबूज केस की मिस्ट्री गहराई, आखिर उस रात क्या हुआ था?

मुंबई : दिल, दिमाग, आंत का रंग हरा, फूड पॉइजनिंग से मौतें नहीं, मुंबई तरबूज केस की मिस्ट्री गहराई, आखिर उस रात क्या हुआ था? पायधुनी इलाके मुंबई में हाल ही में हुई एक घटना, जिसमें एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई, ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सचमुच बिरयानी खाने के बाद खाया गया तरबूज़ ही उनकी मौत का कारण बना, या इसके पीछे कोई और वजह है? शुरुआती अंदाज़ों में तरबूज़ को ही इसका दोषी माना जा रहा था, जिसके चलते वह स्थानीय बाज़ारों से गायब हो गया। हालांकि, नई जानकारियों से पता चलता है कि अब्दुल्ला डोकाडिया के परिवार की मौत का कारण शायद तरबूज़ नहीं, बल्कि ज़हर था। हालांकि एफएसडीए को घर से लिए गए सैंपल्स में कहीं भी जहर नहीं मिली है। 
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मुंबई : रोज ५०-६० दर्ज होते ब्रेन स्ट्रोक के मामले; मौत और विकलांगता का चौथा सबसे बड़ा कारण

मुंबई : रोज ५०-६० दर्ज होते ब्रेन स्ट्रोक के मामले; मौत और विकलांगता का चौथा सबसे बड़ा कारण लकवा यानी ब्रेन स्ट्रोक जिसे लोग मामूली कमजोरी समझ लेते हैं, आज भारत में मौत और विकलांगता का चौथा सबसे बड़ा कारण बन चुका है। मुंबई जैसे महानगर में रोज ५०-६० नए मामले इसके दर्ज होते हैं, लेकिन दुख की बात है कि केवल १० प्रतिशत मरीज ही समय पर अस्पताल पहुंच पाते हैं। अधिकतर मरीज देर होने पर स्थाई विकलांगता या गंभीर न्यूरोलॉजिकल नुकसान झेलते हैं।
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मुंबई : न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक घोटाला - लाय डिटेक्टर के बाद हितेश मेहता का ब्रेन मैपिंग टेस्ट

मुंबई : न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक घोटाला - लाय डिटेक्टर के बाद हितेश मेहता का ब्रेन मैपिंग टेस्ट मुंबई पुलिस की EOW 122 करोड़ रुपये के न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक घोटाले की जांच कर रही है। मुख्य आरोपी हितेश मेहता का झूठ पकड़ने वाला परीक्षण अनिर्णायक होने के कारण, गबन की गई धनराशि के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए ब्रेन मैपिंग परीक्षण को मंजूरी दी गई है।
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ब्रेन सर्जरी के बाद सदगुरु के स्वास्थ्य में सुधार... अस्पताल में लिखी कविता-'लॉस्ट मी इन यू'

ब्रेन सर्जरी के बाद सदगुरु के स्वास्थ्य में सुधार... अस्पताल में लिखी कविता-'लॉस्ट मी इन यू' इशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ब्रेन में रक्तस्राव होने के कारण रविवार, 17 मार्च को अपोलो अस्पताल में उनकी सर्जरी की गई थी। 66 वर्षीय सद्गुरु ईशा फाउंडेशन के संस्थापक हैं और उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए 'मिट्टी बचाओ' और 'रैली फॉर रिवर्स' जैसे अभियान शुरू किए हैं। इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल से दी गई जानकारी के मुताबिक मस्तिष्क में रक्तस्राव को दूर करने के लिए 17 मार्च को उनकी सर्जरी की गई थी। सर्जरी के बाद सद्गुरु को वेंटिलेटर से हटा दिया गया और उनके स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है।’
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