मुंबई : बेकाबू सड़क हादसे; दुर्घटनाओं से हुई मौतों में २३ प्रतिशत की वृद्धि
Mumbai: Road accidents rampant; accident deaths rise by 23 percent
महाराष्ट्र में सड़क हादसों ने अब भयावह रूप ले लिया है। हर दिन हो रहे सड़क हादसों और उसमें हो रही मौतों ने सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुरबाड-कल्याण मार्ग पर हुए ताजा हादसे में ११ लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। इससे पहले भी समृद्धि महामार्ग और मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर कई बड़े हादसे हो चुके हैं, जिनमें दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि आम नागरिक घर से निकलते समय अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित है।
मुंबई : महाराष्ट्र में सड़क हादसों ने अब भयावह रूप ले लिया है। हर दिन हो रहे सड़क हादसों और उसमें हो रही मौतों ने सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुरबाड-कल्याण मार्ग पर हुए ताजा हादसे में ११ लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। इससे पहले भी समृद्धि महामार्ग और मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर कई बड़े हादसे हो चुके हैं, जिनमें दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि आम नागरिक घर से निकलते समय अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित है।
बता दें कि राज्य में सड़क हादसों के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। २०१९ में सड़क हादसों में १२,७८८ मौतें हुई थीं, जबकि वर्ष २०२४ में यह आंकड़ा १५,७१५ पर पहुंच गया। विगत पांच वर्ष में इसमें कुल २३ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। समृद्धि महामार्ग पर भी स्थिति चिंताजनक है। वर्ष २०२४ में यहां १३७ हादसे हुए, जबकि वर्ष २०२५ में १८५ हादसे हुए, मतलब ३७ प्रतिशत वृद्धि हुई है। क्रमश: मौतें भी १२६ से बढ़कर १५२ हुई हैं। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह फेल साबित हो रही है। लगातार हो रहे हादसों से लोगों में भारी आक्रोश है। पीड़ित परिवारों को न तो समय पर मदद मिलती है और न ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है। महाराष्ट्र में सड़क हादसे अब ‘दुर्घटना’ नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का नतीजा बन चुके हैं। जब तक सरकार सख्त कदम नहीं उठाती, तब तक मौतों का यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है।
अब तक नहीं बनी ठोस रणनीति
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार कौन? क्यों नहीं हो रही सख्त कार्रवाई? सरकार की ओर से सड़क सुरक्षा को लेकर कई दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। न तो ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है और न ही हादसों को रोकने के लिए कोई ठोस रणनीति नजर आती है।
भड़का विपक्ष, लगाए आरोप
विपक्ष का आरोप है कि परिवहन विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण हादसे बढ़ रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि राज्य में क्षमता से ज्यादा यात्रियों को ढोने वाले वाहनों पर कोई सख्ती नहीं है। ओवरलोडिंग, खराब सड़कें और नियमों की अनदेखी आम हो चुकी है।


