मुंबई : उद्धव ठाकरे की वो गलती, जिसने छीन ली बीएमसी की गद्दी, वरना अभी कहानी कुछ और होती

Mumbai: Uddhav Thackeray's mistake cost him the BMC reins, or else the story would have been different.

मुंबई : उद्धव ठाकरे की वो गलती, जिसने छीन ली बीएमसी की गद्दी, वरना अभी कहानी कुछ और होती

मुंबई की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर हुआ है. बीएमसी मेंं अब ठाकरे की बादशाहत खत्म हो गई. भाजपा ने अपने 25 साल का वनवास खत्म कर बीएमसी चुनाव में विजय पताका लहरा दिया. बीएमसी यानी बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनावों में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना वाली महायुति ने शानदार जीत दर्ज की है. देवेंद्र फडणवीस की रणनीति के आगे उद्धव ठाकरे पानी भरते नजर आए. महायुति ने बीएमसी की कुल 227 सीटों में से 118 सीटें जीतीं. यह बीएमसी में बहुमत के 114 के आंकड़े से ज्यादा है.

मुंबई : मुंबई की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर हुआ है. बीएमसी मेंं अब ठाकरे की बादशाहत खत्म हो गई. भाजपा ने अपने 25 साल का वनवास खत्म कर बीएमसी चुनाव में विजय पताका लहरा दिया. बीएमसी यानी बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनावों में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना वाली महायुति ने शानदार जीत दर्ज की है. देवेंद्र फडणवीस की रणनीति के आगे उद्धव ठाकरे पानी भरते नजर आए. महायुति ने बीएमसी की कुल 227 सीटों में से 118 सीटें जीतीं. यह बीएमसी में बहुमत के 114 के आंकड़े से ज्यादा है. भारतीय जनता पार्टी ने अकेले 89 सीटें हासिल कीं, जबकि शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं. यह जीत भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़ी कामयाबी है, क्योंकि उन्होंने मुंबई की सबसे अमीर निकाय पर कब्जा कर लिया, जहां सालाना बजट हजारों करोड़ का होता है. मगर उद्धव ठाकरे का प्रदर्शन भी उतना बुरा नहीं है, जितना शुरू में लगा था.

 

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यह सच है कि इस चुनाव की कहानी उद्धव ठाकरे के लिए दुखद है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना को बीएमसी में 65 सीटों से संतोष करना पड़ा. उद्धव की शिवसेना को 2017 में 84 सीटें मिली थीं. उद्धव ठाकरे ने इस चुनाव में अपने भाई राज ठाकरे के साथ हाथ मिलाया था. हालांकि, उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के साथ गठबंधन का उतना फायदा नहीं मिला, क्योंकि मनसे ने महज 6 सीटें जीतीं. इस तरह उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का गठबंधन महज 71 सीटों पर समिट गया. हालांकि, उद्धव ठाकरे चाहते तो यह कहानी कुछ और हो सकती थी. अगर वह विधानसभा वाली रणनीति ही अपनाते तो शायद नतीजे कुछ और हो सकते थे.

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उद्धव से हो गई एक चूक
अब सवाल है कि आखिर उद्धव ठाकरे से कौन सी चूक हो गई, जिसने बीएमसी की गद्दी छीन ली? अगर उद्धव ठाकरे वह चूक नहीं करते तो क्या उनकी बादशाहत कायम रहती? अगर मौजूदा रिजल्ट को देखेंगे तो यह लगेगा कि उद्धव ठाकरे ही नहीं, कांग्रेस से भी चूक हुई है. जी हां, अगर उद्धव ठाकरे कांग्रेस के साथ गठबंधन करते तो नतीजे अलग हो सकते थे. कांग्रेस ने इस चुनाव में अकेले लड़ने का फैसला किया और 24 सीटें जीतीं. अगर उद्धव ठाकरे कांग्रेस को मनाने में कामयाब रहते और एमवीए यानी महा विकास अघाड़ी को फिर से एकजुट करते, तो शायद वोटों का बंटवारा कम होता और बीएमसी में सीटें ज्यादा मिल सकती थीं.

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डेटा से समझिए कैसे बदल सकता था खेल
आइए बीएमसी चुनाव 2026 के फाइनल रिजल्ट्स के डेटा से इसे समझते हैं. बीएमसी कुल वोटों की बात करें तो भाजपा को 1,179,273 वोट मिले, जो 45.22% हैं. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को 717,736 वोट (27.52%) और कांग्रेस को 242,646 वोट (4.44 फीसदी) मिले. अगर उद्धव ठाकरे और कांग्रेस साथ होते तो उनके वोट कुल 960,382 हो जाते, जो भाजपा के करीब पहुंचते. नतीजों से पता चलता है कि कई वार्डों में जहां महायुति जीती, वहां उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के वोट अलग-अलग पड़ने से फायदा महायुति को हुआ. अगर उद्धव ठाकरे अपने भाई राज ठाकरे के साथ भी कांग्रेस को मिला लेते तो भी स्थिति मौजूदा से बेहतर हो सकती थी. 

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