नई दिल्ली : करोलबाग में चल रहा था गजब का खेल, नॉन-ट्रेसेबल IMEI की लग रही थी मंडी, क्या चीन से है कनेक्शन?

New Delhi: A strange game was going on in Karol Bagh, a market for non-traceable IMEI was being set up, is there any connection with China?

नई दिल्ली : करोलबाग में चल रहा था गजब का खेल, नॉन-ट्रेसेबल IMEI की लग रही थी मंडी, क्या चीन से है कनेक्शन?

देश की राजधानी दिल्ली के करोलबाग के भीड़भाड़ वाले मोबाइल हब में पुलिस ने ऐसी फर्जी मोबाइल फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है. इसन भंडाफोड़ ने राजधानी की सुरक्षा एजेंसियों को चिंता में डाल दिया है. यहां से मिले फोन नॉन-ट्रेसेबल चाइनीज IMEI नंबरों से लैस थे. यानी ऐसे मोबाइल जिन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल है. पुलिस को जांच में इस यूनिट में विदेशी व्यक्तियों के आने-जाने की जानकारी भी लगी. इसके बाद मामले में ‘चाइना लिंक’ और ‘टेरर एंगल’ की जांच तेज हो गई है.

 

नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली के करोलबाग के भीड़भाड़ वाले मोबाइल हब में पुलिस ने ऐसी फर्जी मोबाइल फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है. इसन भंडाफोड़ ने राजधानी की सुरक्षा एजेंसियों को चिंता में डाल दिया है. यहां से मिले फोन नॉन-ट्रेसेबल चाइनीज IMEI नंबरों से लैस थे. यानी ऐसे मोबाइल जिन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल है. पुलिस को जांच में इस यूनिट में विदेशी व्यक्तियों के आने-जाने की जानकारी भी लगी. इसके बाद मामले में ‘चाइना लिंक’ और ‘टेरर एंगल’ की जांच तेज हो गई है.

 

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इस सीक्रेट फैक्ट्री में कथित तौर पर चीन से सॉफ्टवेयर और IMEI नंबर लेकर पुराने मोबाइलों को ‘नए’ फोन की तरह बाजार में सप्लाई किया जा रहा था. जिस तरह से यह फोन ट्रेस नहीं किए जा सकते, इससे आशंका है कि अगर ऐसे डिवाइस किसी आपराधिक गिरोह या आतंकी मॉड्यूल तक पहुंच जाएं तो सुरक्षा एजेंसियों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है.

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निधिन वाल्सन DCP सेंट्रल दिल्ली पुलिस बताया कि दिल्ली पुलिस की सेंट्रल जिले की टीम को करीब 15 दिन पहले इनपुट मिला कि करोलबाग के बीदनपुर, गली नंबर 22 की एक बिल्डिंग में संदिग्ध मोबाइल यूनिट चल रही है. इनपुट में विदेशी नागरिकों के आने-जाने और पुराने बोर्डों को नए फोन बनाकर बेचने जैसी गतिविधियों का भी जिक्र था. 20 नवंबर को पुख्ता जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने यहां छापा मारा और दो मंजिलों से भारी मात्रा में सामान जब्त किया.
पुलिस के मुताबिक यह यूनिट दो साल से चल रही थी और पुराने मोबाइल फोन के मदरबोर्ड कबाड़ी बाजारों से खरीदकर इनका ‘री-बिल्ड वर्ज़न’ तैयार किया जाता था.

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आरोपियों की गिरफ्तारी: किसकी क्या भूमिका?
पुलिस ने इस मामले में अशोक कुमार (मालिक), रामनारायण, धर्मेंद्र कुमार, दीपांशु और दीपक को गिरफ्तार किया है. पूछताछ में इन्होंने IMEI एडिट करके फोन सप्लाई करने की बात मानी है. अब पुलिस यह पता लगा रही है कि इन मोबाइल फोनों की सप्लाई चैन कितनी बड़ी है. किन मार्केट्स में यह फोन बेचे गए और क्या यह डिवाइस किसी आपराधिक गिरोह तक पहुंचे.

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स्पेशल सेल भी जांच में: टेरर एंगल खंगाला जा रहा है
लाल किले की हाल की घटना को देखते हुए, सुरक्षा एजेंसियां इन डिवाइसेज़ के संभावित दुरुपयोग को लेकर सतर्क हैं. अगर कोई अपराधी या आतंकी ऐसे नॉन-ट्रेसेबल फोन का इस्तेमाल करता है तो उसकी लोकेशन ट्रैक करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा. इसी वजह से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल भी मामले में सक्रिय हो गई है.