एक्सप्रेस-वे : सेफ्टी को लेकर कई आधुनिक प्रणालियों का इस्तेमाल

Expressway: Use of many modern systems for safety

एक्सप्रेस-वे : सेफ्टी को लेकर कई आधुनिक प्रणालियों का इस्तेमाल

सड़क मार्ग से मुंबई से सूरत होकर नई दिल्ली के बीच की दूरी कम करने के लिए एक्सप्रेस-वे का निर्माण तेजी से हो रहा है। इस एक्सप्रेस-वे में सेफ्टी को लेकर कई आधुनिक प्रणालियों का इस्तेमाल होगा।

मुंबई- सड़क मार्ग से मुंबई से सूरत होकर नई दिल्ली के बीच की दूरी कम करने के लिए एक्सप्रेस-वे का निर्माण तेजी से हो रहा है। इस एक्सप्रेस-वे में सेफ्टी को लेकर कई आधुनिक प्रणालियों का इस्तेमाल होगा। यह एक्सप्रेस-वे 1350 किमी लंबा और 8 लेन का होगा।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की आधारशिला केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 9 मार्च, 2019 को रखी थी। इसे साल 2024 की शुरुआत तक तैयार करने की संभावना है। यह एक्सप्रेस-वे ऑटोमैटिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से संचालित होगा। इसमें एडवांस वार्निंग साइन तकनीकी का इस्तेमाल होगा।

यह मार्ग कुल पांच राज्यों हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से होकर गुजरेगा। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के मुताबिक एक्सप्रेस-वे में ऑटोमैटिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) का इस्तेमाल होगा। एटीएमएस से हाईवे के हर स्ट्रेच पर 50 से 60 सीसीटीवी कैमरे लगेंगे। इसके लिए एक यूनिफाइड कमांड सेंटर बनेगा, जहां से गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।

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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर एडवांस वार्निंग साइन (एडब्ल्यूएस) भी लगाए जाएंगे। यह एक प्रकार का डिस्प्ले बोर्ड होगा, जिसमें एक्सप्रेस-वे पर होने वाली किसी भी दुर्घटना जैसे ट्रक से आयल टैंक का रिसाव होना। हाईवे पर फिसलन, खराब मौसम, कम विजिबिलिटी की पूर्व सूचना वाहन चालकों को दे दी जाएगी, ताकि वाहन चालक सतर्क हो जाएं। इससे दुर्घटना को टाला जा सकेगा। एटीएमएस के माध्यम से वीडियो रिकॉर्डिंग सिस्टम भी उपलब्ध होगा, जिसमें एक हफ्ते का डेटा स्टोर रहेगा।

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