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मुंबई : ‘कौन ज्यादा लड़कियां फंसाएगा’ की शर्त ने तबाह की कई जिंदगियां, आपसी झगड़े ने खोला खौफनाक राज

मुंबई : ‘कौन ज्यादा लड़कियां फंसाएगा’ की शर्त ने तबाह की कई जिंदगियां, आपसी झगड़े ने खोला खौफनाक राज महाराष्ट्र के अमरावती में चल रहे हाई-प्रोफाइल ब्लैकमेलिंग और शोषण कांड में आए दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं। दरअसल, पुलिसिया जांच में सामने आया है कि इस पूरे कांड की जड़ दो मुख्य आरोपियों, आयान अहमद और उजर खान के बीच लगी एक 'शर्त' थी। दोनों के बीच इस बात की होड़ लगी थी कि कौन ज्यादा लड़कियों को अपने प्रेम जाल में फंसा सकता है। आरोप है कि इसी शर्त के चक्कर में कई लड़कियों का जीवन खराब हो गया।
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Maharashtra 

मुंबई: आपसी कटाक्ष और पलटवार की वजह से सुर्खियों में राणे बनाम राणे! 

मुंबई: आपसी कटाक्ष और पलटवार की वजह से सुर्खियों में राणे बनाम राणे!  महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय सबसे गर्म चर्चाओं में एक नाम है। राणे बनाम राणे! एक ऐसा सियासी ड्रामा, जो घर के अंदर की नाराज़गी से शुरू होकर अब खुले मंच पर आ गया है। केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के दोनों बेटे निलेश राणे और नितेश राणे अब सिर्फ विचारों में नहीं, बल्कि शब्दों के स्तर पर भी आमने-सामने आ गए हैं।
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Maharashtra 

विधायक अबू आज़मी ने लोगों से त्योहारों का राजनीतिकरण न करने और आपसी सम्मान का आह्वान किया

विधायक अबू आज़मी ने लोगों से त्योहारों का राजनीतिकरण न करने और आपसी सम्मान का आह्वान किया होली के त्यौहार से पहले कई मस्जिदों को तिरपाल से ढकने के बाद, समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आज़मी ने लोगों से त्योहारों का राजनीतिकरण न करने और आपसी सम्मान का आह्वान किया। आज़मी ने होली के जश्न मनाने वालों को मुसलमानों पर रंग लगाने से पहले उनकी सहमति लेने की सलाह दी और समुदाय से संघर्ष से बचने का अनुरोध किया, पवित्र महीने के दौरान भाईचारे और क्षमा की भावना पर जोर दिया।
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Mumbai 

हर कोई अपनी जाति और समुदाय के प्रति संवेदनशील है, लेकिन दूसरों के प्रति पारस्परिक सम्मान दिखाने में विफल रहता है - बॉम्बे हाई कोर्ट 

हर कोई अपनी जाति और समुदाय के प्रति संवेदनशील है, लेकिन दूसरों के प्रति पारस्परिक सम्मान दिखाने में विफल रहता है - बॉम्बे हाई कोर्ट  बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने कहा है कि आजकल हर कोई अपनी जाति और समुदाय के प्रति संवेदनशील है, लेकिन दूसरों के प्रति पारस्परिक सम्मान दिखाने में विफल रहता है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि हर सोशल मीडिया पोस्ट, टिप्पणी या भाषण पर प्रतिक्रिया की आवश्यकता नहीं होती है और असहमति व्यक्त करने के और भी परिष्कृत तरीके हैं।
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